ईरान-अमेरिका तनाव का असर, शेयर बाजार में भारी गिरावट; सेंसेक्स 1684 अंक टूटा

HIGHLIGHTS
- ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
- सेंसेक्स 1,684 अंक से ज्यादा टूटकर 76,496 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया।
- तेल कीमतों की तेजी से ऑयल, एविएशन समेत कई सेक्टरों के शेयर दबाव में रहे, जबकि निवेशकों की नजर वैश्विक हालात और आगामी आर्थिक संकेतों पर है।
नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,684.11 अंक यानी 2.15 प्रतिशत गिरकर 76,496.61 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 496.55 अंक यानी 2.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,902.15 पर आ गया और 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।
बाजार में गिरावट की रफ्तार उस समय और बढ़ गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ संघर्ष विराम संबंधी अंतरिम समझौते को समाप्त बताए जाने के बाद निवेशकों की चिंता और गहरा गई।
कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई बाजार की चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को घरेलू अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए चुनौती माना जाता है।
सुबह के कारोबार में ही बाजार दबाव में आ गया था। सेंसेक्स 550 से ज्यादा अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि निफ्टी भी 24,250 के स्तर से नीचे चला गया। दिन बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और तेज हो गया।
रुपये पर भी पड़ा दबाव
शेयर बाजार में गिरावट के साथ रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे फिसलकर 95.17 के स्तर पर पहुंच गई।
इन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उन कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा पड़ा, जिनका कारोबार सीधे तौर पर ईंधन लागत से जुड़ा है।
तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के शेयरों में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, विमानन क्षेत्र की कंपनी इंडिगो के शेयर भी दबाव में रहे। महंगे एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की आशंका से एयरलाइन कंपनियों के शेयर प्रभावित हुए।
वैश्विक बाजारों में भी दिखी अस्थिरता
पश्चिम एशिया के तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एशियाई बाजारों में जापान का टॉपिक्स और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 कमजोर रहे, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग में तेजी दर्ज की गई। चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग स्थिर रहा।
अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों के वायदा कारोबार में भी सीमित हलचल देखने को मिली।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति और मानसून की स्थिति प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव से बाजार पर अल्पकालिक दबाव बना रह सकता है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद के कारण लंबी अवधि में बाजार में सुधार की उम्मीद बनी हुई है। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान दें।
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