भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी मिल गई है। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाला चौथा राज्य बनेगा।
विधानसभा में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच यूसीसी विधेयक बहुमत से पारित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्ष दोहरा रवैया अपना रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया सब देख रही है और विपक्ष के लोग स्वयं लज्जित होंगे। माताएं-बहनें इन्हें माफ नहीं करेंगी।
भारी हंगामे के बीच विधेयक हुआ पारित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जब विधानसभा में विधेयक पर अपना वक्तव्य दे रहे थे, उस समय कांग्रेस विधायकों ने लगातार विरोध किया। विपक्ष की ओर से नारेबाजी भी की गई।
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करती आई है और देश की जनता की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है।
लिव-इन रिलेशनशिप का कराना होगा रजिस्ट्रेशन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश की धरती पर वही रहेगा जिसने एक विवाह किया हो। एक से अधिक विवाह करने वाला अब जेल जाएगा। उन्होंने कहा कि आज इतिहास बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग बहनों को खिलौना समझ लेते हैं। बहनों का जीवन नर्क बनाने वालों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि राम से रहीम तक हर नागरिक एक कानून के तहत चले, इसी उद्देश्य से समान नागरिक संहिता लाई गई है।
विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर प्रावधान
यूसीसी विधेयक में विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। कानून बनने के बाद मध्य प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा यूसीसी लागू होने के बाद तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह करने के लिए हलाला जैसी शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या किसी को इसके लिए मजबूर करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
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