वैश्विक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार सुस्त, सेंसेक्स 58 अंक गिरा और निफ्टी में भी कमजोरी
By Hitesh — July 21, 2026

HIGHLIGHTS
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और एफआईआई की बिकवाली के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सपाट रही।
- शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 58.89 अंक और निफ्टी 22.45 अंक की गिरावट के साथ खुले, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस समेत कई दिग्गज शेयर दबाव में रहे।
- विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों और कॉरपोरेट नतीजों के बीच बाजार सीमित दायरे में रह सकता है, जबकि चुनिंदा शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।
Author: — Dainik Dehat
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सपाट रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला। वैश्विक संकेतों में कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के चलते बाजार के सीमित दायरे में रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। वहीं, कॉरपोरेट नतीजों के सीजन के बीच कुछ चुनिंदा शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
मंगलवार सुबह कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 58.89 अंक की गिरावट के साथ 77,649.63 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 22.45 अंक टूटकर 24,216.05 पर कारोबार करता नजर आया।
इन शेयरों में दिखी कमजोरी और तेजी
सेंसेक्स में शामिल एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और मारुति जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक लगातार दूसरे कारोबारी दिन दबाव में रहा, क्योंकि बैंक की तिमाही आय में मार्जिन से जुड़ी उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं।
दूसरी ओर, टेक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक जैसे शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार 20 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार से 1,121.04 करोड़ रुपये की निकासी की। इस बीच वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 88.66 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
बाजार की सुस्ती के पीछे ये कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।
- कच्चे तेल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिससे बाजार पर दबाव है।
- रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा कमजोर बनी हुई है और यह करीब 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रही है।
- एफआईआई की बिकवाली: विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं।
- वैश्विक बाजारों के संकेत: दुनिया भर के बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं।
वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मंगलवार को अलग-अलग रुझान देखने को मिले।
अमेरिका में एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में टोक्यो समय के अनुसार सुबह 11:58 बजे तक 0.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। जापान का टॉपिक्स इंडेक्स 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 इंडेक्स 0.1 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.6 प्रतिशत नीचे रहा। चीन का शंघाई कंपोजिट 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। यूरोप में यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी बाजार की नजर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड का करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक आना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन मौजूदा अनिश्चितताओं के कारण कीमतों में फिर बढ़ोतरी का जोखिम बना हुआ है।
उनके अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर बाजार पर दबाव के रूप में दिखाई दे सकता है और निवेशकों की धारणा भी प्रभावित हो सकती है।
निवेशकों की इक्विटी में कम हुई दिलचस्पी
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा कि बाहरी चुनौतियों के कारण निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके चलते इक्विटी में निवेश की रुचि सीमित हुई है।
इससे पहले सोमवार 20 जुलाई 2026 को सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत गिरकर 77,708.52 पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,238.50 पर बंद हुआ था।
आगे बाजार में स्टॉक स्पेसिफिक गतिविधियों पर नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों का सीजन आगे बढ़ने के साथ बाजार में इंडेक्स के बजाय चुनिंदा शेयरों में ज्यादा हलचल देखने को मिल सकती है।
बाजार जानकारों के मुताबिक, जब तक वैश्विक परिस्थितियों में सुधार नहीं आता और रुपये की कमजोरी कम नहीं होती, तब तक व्यापक बाजार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
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