शारदा नदी में बढ़ा पानी, पीलीभीत के हजारा गांव में बाढ़ जैसे हालात

HIGHLIGHTS
- हजारा गांव के खेतों और रास्तों पर चार से पांच फीट तक पानी बहने लगा।
- निचले इलाके में बने कई ग्रामीणों के घर जलभराव की चपेट में आए।
- पिछले छह दिनों से शारदा नदी में तेज कटान जारी है।
पीलीभीत। पूरनपुर तहसील क्षेत्र में वनबसा बैराज से शुक्रवार को कई चरणों में शारदा नदी में अतिरिक्त पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया। इससे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए। गांव हजारा के कई घरों में पानी भर गया, जबकि खेतों और गांव के रास्तों पर चार से पांच फीट तक पानी बहने लगा। नाव की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीण घरों में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बचाव कार्य शुरू कराने की अपील की है।
छह दिनों से जारी है नदी का कटान
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले छह दिनों से शारदा नदी तेजी से कटान कर रही है। गांव के 14 किसानों की कई एकड़ जमीन फसल समेत नदी में समा चुकी है। नदी के लगातार कटान के कारण गांव हजारा के साथ अशोकनगर और भरतपुर में भी कटान का खतरा बताया जा रहा है।
शुक्रवार को वनबसा बैराज से कई बार शारदा नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ा गया। इसके बाद नदी उफना गई और हजारा गांव के खेतों तथा रास्तों में चार से पांच फीट तक पानी भर गया। जलभराव गांव हजारा के समीप तक पहुंच गया है।
कई ग्रामीणों के घरों में घुसा पानी
गांव के किनारे निचले इलाके में बने लालाराम, शंकर, रामस्वरूप, नत्थूलाल, अजय, रामचंद्र, मनोज और हरवंश के घरों में पानी भर गया है।
खेतों और रास्तों में पानी भरने के कारण शुक्रवार को ग्रामीण खेतों और नदी कटान वाले स्थानों तक नहीं पहुंच सके। जलभराव लगातार बढ़ने से ग्रामीणों ने गांव के टापू में बदलने की आशंका जताई है। हालांकि, फिलहाल गांव से भुरजनिया जाने वाले रास्ते से लोगों का आवागमन जारी है।
गांव में नाव की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन से बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है।
सिख समाज ने नदी किनारे की अरदास
शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर और कटान से बचाव की प्रार्थना को लेकर सिख समाज के किसानों और अन्य लोगों ने बृहस्पतिवार शाम नदी किनारे पहुंचकर मां शारदा से प्रार्थना की।
पूरनपुर गुरुद्वारा श्री सिंह सभा के हेड ग्रंथी जसपाल सिंह ने अरदास की। इस दौरान शारदा नदी में लगर, दलिया, बादाम और खसखस की शरदाई चढ़ाई गई। क्षेत्र को नदी के कहर से बचाने और सुरक्षित रखने की प्रार्थना की गई।
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