पटना। बिहार सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में ‘‘सात निश्चय-3 (2025-30)” के तहत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 64 एजेंडों पर मुहर लगी।

सरकार ने घोषणा की है कि राज्य के सभी जिलों के मॉडल स्कूलों और हर प्रखंड के एक-एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को अब ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना पर वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

208 प्रखंडों में खुलेंगे नए डिग्री कॉलेज

बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्य के 208 प्रखंडों में जहां अब तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं है, वहां नए कॉलेज खोले जाएंगे। इन कॉलेजों को संबंधित विश्वविद्यालयों की अंगीभूत इकाई के रूप में शामिल किया जाएगा।

इसके लिए कुल 9,152 पदों का सृजन किया गया है, जिनमें प्रत्येक कॉलेज के लिए 44-44 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल होंगे। साथ ही कॉलेजों के प्रारंभिक संचालन और भवन सुधार के लिए प्रति कॉलेज 50 लाख रुपये के हिसाब से कुल 104 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

हर प्रखंड में बनेगा मॉडल स्कूल

शिक्षा विभाग ने प्रत्येक प्रखंड से एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को मॉडल स्कूल के रूप में चयनित किया है। इन स्कूलों का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है।

इन विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और छात्रों के चयन के लिए मेरिट आधारित व्यवस्था लागू होगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर प्रखंड में ऐसा स्कूल तैयार हो, जो राज्य ही नहीं बल्कि देश में भी पहचान बनाए।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे स्कूल

इन मॉडल स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशाला, आईसीटी लैब, डिजिटल कक्षाएं, पुस्तकालय और स्मार्ट बोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा छात्रों के लिए कोचिंग, साप्ताहिक टेस्ट और रेमेडियल क्लास की व्यवस्था भी होगी।

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं जैसे स्वच्छ पेयजल, शौचालय, फर्नीचर, खेल मैदान, बाउंड्री वाल और हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। छात्र-छात्राओं के समग्र विकास के लिए सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा।

बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

सरकार ने मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत 23,165 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य राज्य के बिजली उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम करना है।

यह राशि अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक हर महीने जारी की जाएगी। योजना के तहत एनटीपीसी और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी को सीधे भुगतान किया जाएगा, जिससे बिजली व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।

लंबित चालानों के लिए नई योजना

परिवहन विभाग में 90 दिन से अधिक पुराने चालानों के निपटारे के लिए ‘एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना 2026’ लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत मामलों का निपटारा वर्चुअल कोर्ट और लोक अदालत के माध्यम से किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य चालान प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है ताकि लोगों को राहत मिल सके और राजस्व संग्रह में सुधार हो।

निजी कॉलेजों की फीस पर सरकार की नजर

निजी व्यावसायिक कॉलेजों में फीस और एडमिशन प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए नई नियमावली 2026 लागू की जाएगी। इसके लिए एक नौ सदस्यीय समिति बनाई जाएगी, जो फीस निर्धारण और नामांकन प्रक्रिया पर निगरानी रखेगी।

इसका उद्देश्य शिक्षा में पारदर्शिता लाना और अनियंत्रित फीस वृद्धि पर रोक लगाना है।

वाराणसी हेलीपोर्ट परियोजना को हरी झंडी

वाराणसी के डोमरी क्षेत्र में प्रस्तावित हेलीपोर्ट परियोजना को बिहार सरकार ने अनापत्ति दे दी है। हालांकि भूमि का स्वामित्व बिहार सरकार के पास ही रहेगा और यह फैसला अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

इस परियोजना से वाराणसी में पर्यटन और आवागमन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे देश-विदेश के यात्रियों को सुविधा होगी।