पटना। बिहार में निजी स्कूलों के संचालन और मान्यता प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। शिक्षा विभाग अब निजी विद्यालयों को जारी होने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के नियमों में संशोधन करने जा रहा है, जिसमें तीन नई शर्तें जोड़ी जाएंगी।
1990 के बाद पहली बार बदलाव की तैयारी
शिक्षा विभाग द्वारा NOC का मौजूदा प्रारूप वर्ष 1990 में तैयार किया गया था और पिछले 36 वर्षों में इसमें कोई बड़ा संशोधन नहीं हुआ। अब बदलते समय और छात्रों के हितों को देखते हुए इसमें नए प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं।
निजी स्कूलों पर लगेंगी नई शर्तें
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, स्कूल प्रबंधन छात्रों पर यह दबाव नहीं बना सकेगा कि वे किताबें, कॉपी या ड्रेस किसी विशेष दुकान या संस्थान से ही खरीदें।
इसके अलावा, यदि किसी छात्र की फीस बकाया है तो उसे परीक्षा में बैठने से रोका नहीं जा सकेगा और न ही उसके परीक्षा परिणाम को रोका जाएगा।
तीसरे प्रस्तावित नियम के तहत निजी स्कूलों को अपने आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित सरकारी विद्यालयों की आधारभूत संरचना के सुधार में भी सहयोग करना होगा।
सरकार का तर्क: छात्रों के हित की सुरक्षा
शिक्षा विभाग का कहना है कि हाल के समय में यह शिकायतें मिलती रही हैं कि कई निजी स्कूल छात्रों और अभिभावकों पर किताबों और यूनिफॉर्म की खरीद को लेकर दबाव बनाते हैं। इसके साथ ही फीस विवाद के चलते बच्चों को परीक्षा से वंचित किए जाने के मामले भी सामने आए हैं।
सरकार का मानना है कि इन स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए NOC प्रक्रिया में स्पष्ट कानूनी प्रावधान जोड़ना जरूरी है।
मौजूदा व्यवस्था क्या है
अभी तक NOC जारी करते समय मुख्य रूप से स्कूल की भूमि, भवन और बुनियादी ढांचे की जांच की जाती है। शिक्षकों की संख्या और अन्य शैक्षणिक मानकों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।
सख्ती की चेतावनी
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यह कदम पूरी तरह छात्रों के हित में उठाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल नए नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसकी NOC रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।