नई दिल्ली। आबकारी नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है और ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी के आदेश में उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। ED का कहना है कि जज ने बिना एजेंसी का पक्ष सुने तटस्थ नहीं रहते हुए टिप्पणी की है।
सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ में चल रही है, जिसमें ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई आलोचनाएँ प्रवर्तन निदेशालय से संबंधित नहीं हैं और यह टिप्पणियाँ एजेंसी के खिलाफ अनुचित रूप से की गई हैं।
पीठ ने कहा कि यह मामला कोर्ट में चुनौती के अधीन है और सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 लोगों को नोटिस
दिल्ली हाईकोर्ट ने राउन एवेन्यू कोर्ट के सीबीआई और उसके अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य 23 लोगों को नोटिस जारी किया जाए और उन्हें जवाब दाखिल करने का अवसर मिले। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
ED का दावा और कोर्ट में अपील
ED ने अपनी याचिका में कहा कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियाँ अतिव्यापक और अनुचित हैं। एजेंसी का कहना है कि अदालत ने बिना सबूतों की जांच और उसके पक्ष को सुने ही कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। ED ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपील की है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग जांच से संबंधित टिप्पणियों को हटाने का निर्देश दे।
ट्रायल कोर्ट ने हाल ही में सीबीआई की जांच में यह पाया कि आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और अन्य 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किया जाए, लेकिन आदेश में ED और पीएमएलए की जांच को लेकर भी कई कड़ी टिप्पणियाँ की गई थीं। ED का कहना है कि यह न्यायिक हस्तक्षेप का मामला है क्योंकि एजेंसी की ओर से कोई पक्ष या सबूतों की जांच नहीं की गई थी।