पटना। बिहार विधानसभा में आज यूजीसी की इक्विटी गाइडलाइन को लागू करने के प्रस्ताव पर विपक्ष और भाजपा के विधायकों के बीच गर्मागर्म बहस देखने को मिली। विपक्ष की ओर से माले विधायक संदीप सौरभ ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव और उत्पीड़न के मामलों का हवाला देते हुए प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान ‘ब्राह्मणवाद’ शब्द का प्रयोग होने पर भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष ने तुरंत इसे कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
विपक्ष का आरोप और प्रस्ताव
माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार और देश के विश्वविद्यालयों में जाति आधारित उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने रोहित वेमुला केस का उदाहरण देते हुए बताया कि 2019 से 2024 के बीच उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित उत्पीड़न के मामले 118 प्रतिशत बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि 2026 में यूजीसी ने इक्विटी गाइडलाइन लागू की थी, लेकिन ब्राह्मणवादी मानसिकता और राजनीतिक दबाव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।
सौरभ ने सरकार से आग्रह किया कि विश्वविद्यालयों में जातीय उत्पीड़न को रोकने के लिए कानून बनाए जाए और केंद्र सरकार से अध्यादेश लाकर इसे लागू कराने का आग्रह किया जाए। उन्होंने विधानसभा से इस प्रस्ताव को पारित करने की भी मांग की।
भाजपा का जवाब और हंगामा
विपक्ष के बयान के तुरंत बाद भाजपा के विधायकों ने विरोध जताया। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि सदन में किसी जाति-सूचक शब्द का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है और सभी समाजों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे समाज में विभाजन पैदा कर देश के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ब्राह्मण समाज का भारतीय संस्कृति और शिक्षा में योगदान अनमोल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ विपक्षी नेता इसे नजरअंदाज कर आरोप लगाते हैं और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाते हैं।
राजद का जवाब
वहीं, राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि संदीप सौरभ ने किसी भी जाति का नाम नहीं लिया और उन्होंने केवल ब्राह्मणवाद की बात की, जो किसी जाति विशेष से संबंधित नहीं है। उन्होंने डिप्टी सीएम पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि वे शब्दों के राजनीतिक अर्थ को समझने से कतरा रहे हैं।
सदन का माहौल
इस बहस के दौरान सदन में विपक्ष और भाजपा के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा चलता रहा। अध्यक्ष प्रेम कुमार ने बार-बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने की अपील की।