पटना विश्वविद्यालय में शनिवार को सीनेट की वार्षिक बैठक के दौरान माहौल अचानक गरमा गया, जब छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप ले लिया। AISA के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर परिसर में जुटे थे। सुरक्षा को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले ही पुलिस बल तैनात कर दिया था और मुख्य गेट पर कड़ी निगरानी रखी गई थी।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है और विरोध की आवाज को दबाने के लिए पुलिस का सहारा लिया जा रहा है। स्थिति उस समय बिगड़ गई जब पुलिस ने छात्रों को परिसर से बाहर कर मुख्य गेट बंद कर दिया। इससे नाराज छात्र गेट पर चढ़ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।

आक्रोश बढ़ने पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने गेट का ताला तोड़कर दोबारा परिसर में प्रवेश कर लिया और जेपी नारायण सभागार की ओर बढ़ने लगे, जहां सीनेट की बैठक चल रही थी। पुलिस ने उन्हें सभागार के प्रवेश द्वार पर रोक दिया, जिसके बाद छात्रों ने वहीं धरना शुरू कर दिया और भूख हड़ताल की घोषणा भी कर दी।

छात्रों का कहना था कि वे कुलपति से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि फीस वृद्धि, छात्र सुविधाओं की कमी और कैंपस में पुलिस की लगातार मौजूदगी जैसे मुद्दों पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि रात के समय पुलिस की सख्ती से परिसर में डर का माहौल बना रहता है।

इस बीच जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को भी छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा। छात्रों ने उन्हें घेरकर अपनी मांगों पर जवाब मांगा। बाद में नीरज कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद की कमी स्पष्ट है और कुलपति से बातचीत की आवश्यकता है।

हंगामे के बावजूद सीनेट की बैठक जारी रही और विश्वविद्यालय का बजट पारित कर दिया गया। बैठक के बाद प्रॉक्टर और डीन ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कुछ छात्रों को समझाकर प्रदर्शन समाप्त कराया गया, हालांकि कुछ छात्रों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही।