बेतिया। चनपटिया–लौरिया मुख्य मार्ग पर दुबौलिया गांव के पास शनिवार को भूमि मापी और दखल-दहानी के दौरान हालात उस समय बिगड़ गए, जब अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम पर कब्जाधारियों ने हमला कर दिया। इस घटना में अंचल अधिकारी नीतेश कुमार सेठ, स्थानीय थाना प्रभारी रमेश कुमार शर्मा समेत कुल पांच लोग घायल हो गए।
प्रशासन की टीम व्यवसायी मनोज जायसवाल की लगभग दो एकड़ रैयती जमीन की मापी कराने दंडाधिकारी और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान विरोध कर रहे लोगों ने अचानक उग्र रूप धारण कर लिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों से पुलिस और अंचल कर्मियों पर हमला किया, वहीं एक झोपड़ी में आग भी लगा दी गई। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों को पकड़कर आग में झोंकने की कोशिश भी की गई।
घटना में घायल अधिकारियों और कर्मियों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन को बिना मापी कराए वापस लौटना पड़ा। यह विवाद वाद संख्या 109/2025-26 से संबंधित है, जिसमें मनोज जायसवाल और वंशराज राम के बीच जमीन को लेकर मुकदमा चल रहा है। डीसीएलआर न्यायालय के आदेश के अनुपालन में ही प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही थी।
लाठी-डंडों के साथ उतरी महिलाएं, ड्रोन भी तोड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मापी शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में महिलाएं लाठी-डंडे लेकर सामने आ गईं और पुलिस व अंचल कर्मियों को रोकने लगीं। इस दौरान न सिर्फ हिंसक झड़प हुई, बल्कि सर्वेक्षण के लिए इस्तेमाल हो रहे ड्रोन कैमरे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ड्रोन संचालन कर रहे कर्मी का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।
घायलों में सीओ नीतेश कुमार सेठ, थानाध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा, दारोगा प्रिया रंजन, दारोगा निशु कुमारी और ड्रोन ऑपरेटर अमित कुमार शामिल हैं, जिनका स्थानीय रेफरल अस्पताल में इलाज कराया गया।
थानाध्यक्ष रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि एक पक्ष द्वारा खुद की झोपड़ी में आग लगाकर प्रशासनिक कर्मियों को फंसाने की कोशिश की गई। मामले में प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी लौट चुकी है प्रशासनिक टीम
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 17 दिसंबर को भी नरकटियागंज के भूमि उपसमाहर्ता के निर्देश पर भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन महिलाओं के विरोध के चलते कार्रवाई नहीं हो सकी थी। उस समय सीओ ने अवैध कब्जाधारियों को 10 दिन के भीतर जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया था, बावजूद इसके कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद शनिवार को दोबारा कार्रवाई की गई।