नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम होने की संभावना नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता होने का असर भारत में उपभोक्ताओं तक पहुंचने में समय लगेगा।
मंत्री ने गुरुवार को कहा कि ईंधन की कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रूड रेट पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि सप्लाई चेन, शिपिंग और मौजूदा बाजार स्थितियों का भी इस पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में हाल के तनाव और समुद्री मार्गों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते जहाजों के ट्रैफिक के कारण तेल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। इस वजह से पहले हुई लागत वृद्धि का असर अभी भी जारी है और पूरी स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा।
सुरेश गोपी के अनुसार, हाल के महीनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ती कीमतों के असर से बचाने के लिए कुछ बोझ खुद वहन किया, जिससे करीब 12,000 करोड़ रुपये का भार सरकारी खजाने पर पड़ा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक देश या राज्य द्वारा टैक्स कम न करने के कारण पूरा भार केंद्र सरकार और तेल कंपनियों पर पड़ा, जिससे संतुलन बनाए रखना जरूरी हो गया।
कच्चे तेल के दामों में गिरावट
वैश्विक बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1.64% टूटकर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 2% गिरकर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।