दिल्ली: वजीराबाद के जगतपुर गांव में बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के चल रहे स्विमिंग पूलों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां 100 से 300 रुपये प्रति घंटे के शुल्क पर कई निजी स्विमिंग पूल संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें न तो प्रशिक्षित लाइफगार्ड मौजूद हैं, न इंस्ट्रक्टर, और न ही लाइफ जैकेट जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं।
इसी लापरवाही के चलते 10 वर्षीय संस्कार वर्मा की डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मृतक बच्चे के पिता नीरज वर्मा ने कहा कि अगर मौके पर सुरक्षा कर्मी या प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बच्चा गहरे पानी तक कैसे पहुंच गया, और किसी को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद जब वे और स्थानीय लोग पूल पर पहुंचे, तो कुछ प्रभावशाली लोगों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नीरज वर्मा का कहना है कि बच्चों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के इन अवैध पूलों में ले जाया जा रहा था, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ गई।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इलाके में तीन से चार ऐसे स्विमिंग पूल बिना वैध अनुमति के चल रहे हैं। इन पूलों के लिए बड़े स्तर पर बोरवेल भी लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अनदेखी के कारण यहां लगातार खतरा बना हुआ है।
परिजनों ने बताया कि शनिवार रात काफी कहने के बाद उनके परिचित महेंद्र बच्चों को स्विमिंग के लिए ले जाने को तैयार हुए थे। पहले ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं था। दोनों बच्चों के लिए 500 रुपये फीस भी दी गई थी। अब परिवार उस फैसले को याद कर गहरे सदमे में है।
घटना रविवार सुबह की बताई जा रही है, जब जगतपुर गांव के मिलन विहार इलाके में स्थित एक अवैध स्विमिंग पूल में संस्कार वर्मा अन्य बच्चों के साथ नहाने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। कुछ देर बाद अन्य बच्चों ने उसे पानी के तल में देखा और शोर मचाया। उसे तुरंत बाहर निकालकर नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत में उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।