दिल्ली: एक बड़े ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए जांच में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह की कमान एक कंप्यूटर इंजीनियर रवि राठौड़ के हाथ में थी, जो पहले कई नामी मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर चुका था। बताया जा रहा है कि वह 2.50 लाख रुपये मासिक सैलरी पर बेंगलुरु की एक एमएनसी में कार्यरत था, लेकिन इसके बावजूद उसने ठगी की राह चुन ली।

रिश्तेदार के जरिए बना नेटवर्क का हिस्सा

जांच के अनुसार, रवि की मुलाकात एक रिश्तेदार के माध्यम से सुदामा नामक व्यक्ति से हुई, जो आर्थिक रूप से मजबूत था। सुदामा ने ही रवि को ऑनलाइन फ्रॉड का पूरा प्लान समझाया। वेबसाइट और ऐप डेवलपमेंट में दक्ष रवि ने सुदामा और विकास के साथ मिलकर ‘ट्रेड मेकर अल्गो’ नाम से एक ऐप और वेबसाइट तैयार की।

इसके बाद सनावद में कॉल सेंटर स्थापित करने के लिए बैंक खातों का एक नेटवर्क तैयार किया गया। रवि बेंगलुरु से ही सिस्टम को ऑपरेट करता था और लगातार ऐप और वेबसाइट को अपडेट करता रहता था।

देशभर में 100 करोड़ की ठगी

जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने देशभर में 636 लोगों को निशाना बनाकर 14,232 ट्रांजैक्शनों के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की। बाद में इस रकम को आपस में बांट लिया गया।

महंगी लाइफस्टाइल और शौक

रवि राठौड़ कथित तौर पर ठगी की रकम से महंगी गाड़ियां, इंदौर में लग्जरी फ्लैट और प्रॉपर्टी खरीदने में शामिल रहा। वहीं सुदामा ने इस पैसे का इस्तेमाल खंडवा में लोकल क्रिकेट लीग आयोजित करने में किया और एक टीम से भी जुड़ा रहा, जिस पर वह मोटा खर्च करता था।

कॉल सेंटर और डेटा सप्लाई का मास्टरमाइंड

विकास इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा था, जिसने पहले कई कॉल सेंटरों में काम किया था। उसका काम ठगी के लिए कॉल सेंटर का संचालन करना, लोगों के डेटा जुटाना और फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट्स) के जरिए पैसों को आगे ट्रांसफर करना था।