दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। यह निर्णय क्षेत्र में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में पहुंचने के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण को और बढ़ने से रोकना है।
AQI 226 पहुंचा ‘खराब’ श्रेणी में
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आज 226 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। ग्रैप उप-समिति की बैठक में मौजूदा हालात और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया।
समिति ने पाया कि प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण प्रदूषण स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। IMD के अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक AQI के ‘खराब’ श्रेणी में बने रहने की संभावना है।
सभी एजेंसियों को सख्त निर्देश
सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर के सभी संबंधित विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों को GRAP के पहले चरण के तहत तय किए गए उपाय तुरंत लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही निगरानी और नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है, ताकि स्थिति और खराब न हो।
आदेश को उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मुख्य सचिवों को भी भेजा गया है, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय बना रहे और सभी दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील
आयोग ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे GRAP के तहत जारी नागरिक चार्टर का पालन करें और प्रदूषण कम करने में सहयोग दें। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
GRAP-1 के तहत लागू प्रमुख प्रतिबंध
पहले चरण में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई सख्त उपाय लागू किए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं—
- निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर नियंत्रण
- सड़कों की नियमित यांत्रिक सफाई और पानी का छिड़काव
- खुले में कचरा जलाने पर रोक
- धूल नियंत्रण के उपायों का सख्ती से पालन
- औद्योगिक उत्सर्जन पर निगरानी
- वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के निर्देश
इन उपायों का उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही वायु गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है।
लगातार निगरानी जारी
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया है कि वह वायु गुणवत्ता पर लगातार नजर बनाए हुए है और मौसम विभाग तथा आईआईटीएम के पूर्वानुमानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्थिति के अनुसार अतिरिक्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।