नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश को बदलने का अनुरोध किया है। पार्टी ने इस कदम की जानकारी खुद सार्वजनिक की।
न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
पत्र में केजरीवाल और सिसोदिया ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की बात कही है। उन्होंने मौजूदा न्यायाधीश द्वारा मामले की सुनवाई जारी रखने पर कुछ आपत्तियां जताई हैं। हालांकि, इन आपत्तियों का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। मुख्य न्यायाधीश के पास ऐसे अनुरोध पर विचार करने का अधिकार होता है। पार्टी का कहना है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
आरोपी की गिरफ्तारी और जांच का इतिहास
दिल्ली की आबकारी नीति 2021-22 को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। इस नीति में कथित अनियमितताओं के चलते केंद्रीय जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की। इस मामले में केजरीवाल और सिसोदिया दोनों को गिरफ्तार किया गया था। केजरीवाल को पूछताछ के लिए भी बुलाया गया।
नई शराब नीति: क्या था बदलाव?
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए, और हर जोन में अधिकतम 27 दुकानें खोली जा सकें। कुल मिलाकर 849 दुकानों की योजना बनाई गई। नई नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इससे पहले 60% दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट थीं।
सरकार ने तर्क दिया कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का राजस्व बढ़ेगा। इसके साथ ही लाइसेंस फीस भी कई गुना बढ़ा दी गई। उदाहरण के लिए एल-1 लाइसेंस के लिए शुल्क पहले 25 लाख रुपये था, नई नीति में इसे पांच करोड़ रुपये कर दिया गया।
घोटाले के आरोप और विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने आरोप लगाया कि नई नीति से बड़े शराब कारोबारियों को लाभ हुआ, जबकि छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं। आरोप यह भी है कि इसके एवज में आप के नेताओं और अफसरों को घूस दी गई।
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लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी: बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया गया।
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सरकारी राजस्व में कमी: 750 एमएल की एक शराब की बोतल पर रिटेल मुनाफा बढ़ा, जबकि सरकार को मिलने वाला लाभ घट गया।
जांच की शुरुआत
नई शराब नीति में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। अगस्त 2022 में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। इसके अलावा, ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू की। सीबीआई नीति बनाने और लागू करने में कथित गड़बड़ियों पर ध्यान केंद्रित रही, जबकि ईडी धन शोधन से संबंधित जांच कर रही है।