दिल्ली के ज्योति नगर इलाके में बीती गुरुवार देर रात एक दंपती ने आर्थिक परेशानियों से परेशान होकर फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। शव दोनों के अलग-अलग कमरों में मिले। मृतकों की पहचान अजय कुमार दीक्षित (55) और उनकी पत्नी रीता दीक्षित (50) के रूप में हुई।

पुलिस को घटना की सूचना रात 12:05 बजे मिली। उत्तर पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त आशीष मिश्रा ने बताया कि वेस्ट ज्योति नगर स्थित फ्लैट में एक कमरे में अजय कुमार फंदे से लटके हुए थे, जबकि दूसरे कमरे में रीता दीक्षित चुन्नी का इस्तेमाल करके फंदे पर लटकी थीं।

पारिवारिक और आर्थिक पृष्ठभूमि
अजय और रीता अपने दो बेटों, 29 वर्षीय भास्कर और 25 वर्षीय शरद के साथ इस किराए के फ्लैट में रहते थे। अजय पहले एक छोटी फैक्टरी चलाते थे, जो बंद हो गई थी। आर्थिक तंगी के कारण वे लगभग सात-आठ महीने पहले अपना मकान बेचकर किराए के मकान में रहने लगे थे। उन्होंने भजनपुरा और सोनिया विहार में मेडिकल स्टोर खोला था, जिसके लिए उन्होंने कर्ज लिया। पुलिस के अनुसार दंपती पर एक करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज था।

भास्कर के मुताबिक, गुरुवार रात करीब 11 बजे मां ने उन्हें और पिता को खाने के लिए सब्जी लाने भेजा। भास्कर बाजार से लौटे तो फ्लैट का दरवाजा नहीं खुला। पड़ोसी की मदद से जब चौथी मंजिल पर पहुंचे तो भीतर का दृश्य देख कर सन्न रह गए। बाहर के कमरे में पिता अजय का शव फंदे से लटका था और दूसरे कमरे में मां रीता ने खुदकुशी कर ली थी।

सुसाइड नोट में लिखा आर्थिक संकट और डिप्रेशन
पुलिस को प्राप्त सुसाइड नोट में दंपती ने अपने बच्चों या किसी अन्य व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया। नोट में आर्थिक कठिनाइयों और कर्ज के दबाव के चलते जीवन समाप्त करने की बात लिखी थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दोनों डिप्रेशन में थे।

उत्तर पूर्वी जिला पुलिस फिलहाल परिवार और पड़ोसियों से पूछताछ कर मामले की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव के कारण यह कदम उठाया गया।