पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) एक बार फिर चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) बुधवार को बैलेट पेपर की बजाय ईवीएम के इस्तेमाल की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया. वकील एमएल शर्मा की याचिका पर दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस एनवी रमणा की बेंच ने कहा कि वह उनके इस मामले को सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे. याचिका में जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61A की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. देश में इसी कानून के प्रावधान के तहत ही चुनाव में बैलेट पेपर की जगह EVMs से वोटिंग शुरू हुई थी.

चीफ जस्टिस एनवी रमणा ने वकील एमएल शर्मा की दलीलों को सुनने के बाद कहा, “हम इसे देखेंगे… मैं इसे किसी और बेंच के सामने भी सूचीबद्ध कर सकता हूं.” समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शर्मा ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 61A जिसके तहत ईवीएम के इस्तेमाल की इजाजत है, उसे संसद से पारित नहीं कराया गया था, इसलिए इसे जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता है.

इसके अलावा उन्होंने याचिका में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की. शर्मा ने कहा, “मैंने याचिका दायर की है, जो रिकॉर्ड तथ्यों पर आधारित है. मामले का जूडिशियल नोट लिया जा सकता है… चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होने चाहिए.”

देश के 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब में अगले महीने से विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे. यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की शुरुआत 10 फरवरी को होगी और आखिरी चरण का मतदान 7 मार्च को होगा. उत्तराखंड और गोवा में 14 फरवरी को मतदान होगा, जबकि पंजाब में 20 फरवरी को वोटिंग होगी. मणिपुर में दो चरणों में 27 फरवरी और 3 मार्च को मतदान होगा. सभी राज्यों में वोटों की गिनती 10 मार्च को होगी.

इससे पहले कई राजनीतिक दल भी ईवीएम की वैधता पर सवाल उठाते रहे हैं. पिछले कुछ चुनावों में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय बंटी रही. 8 जनवरी को चुनावों की तारीख की घोषणा करते हुए जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुशील चंद्रा का ध्यान जब इस ओर दिलाया गया कि चुनाव हारने वाले दल ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, तो इस पर उन्होंने कहा, ‘ईवीएम अब कोई मुद्दा नहीं है.’