नई दिल्ली। एलपीजी गैस की कमी का असर अब दिल्ली के छोटे और बड़े खाने-पीने के व्यवसायों पर भी दिखाई देने लगा है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में व्यवधान और लगातार बढ़ती कीमतों के कारण राजधानी के लगभग 30-40 फीसदी होटल, ढाबे, रेहड़ी-पटरी के स्टॉल या तो बंद हो गए हैं या सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं।
लक्ष्मी नगर, कृष्णा नगर, बुराड़ी, कनॉट प्लेस, कश्मीरी गेट और पहाड़गंज जैसे इलाकों में कई छोटे होटल और रेस्टोरेंट ने अपना संचालन रोक दिया है। वहीं कुछ व्यवसायों ने महंगे सिलिंडरों की वजह से अपने मेन्यू में कटौती करनी शुरू कर दी है।
रेहड़ी-पटरी और छोटे ढाबों पर सबसे ज्यादा असर
राजधानी में सुबह से देर रात तक चलने वाले स्टॉलों पर हजारों लोग सस्ता और स्वादिष्ट भोजन लेने आते हैं। लेकिन गैस की कमी ने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। अधिकांश रेहड़ी-पटरी वाले रोजाना नकद में कमर्शियल सिलेंडर खरीदते हैं। पहले आसानी से मिलने वाले सिलिंडर अब सप्लायर्स बड़े होटल और रेस्टोरेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे छोटे स्टॉलों और ढाबों को सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है।
सफदरजंग इलाके के रेहड़ी स्टॉल संचालकों ने बताया कि कई दिनों तक सिलेंडर का इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरी में कुछ छोटे 5 किलो वाले अवैध सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण है। गैस की बढ़ी कीमतों ने रोजमर्रा की बचत पर भी असर डाला है। कुछ स्टॉल संचालकों का कहना है कि पहले जहां रोजाना 200-400 रुपये बचते थे, अब गैस महंगी होने के कारण बचत कम हो गई है।
होटल और ढाबों की स्थिति
छोटे होटल और ढाबों के लिए रसोई चलाना अब मुश्किल हो गया है। कटवारिया सराय स्थित एक ढाबा, जो आसपास के ऑफिस कर्मचारियों, टैक्सी चालकों और छोटे कारोबारियों के लिए सस्ता भोजन मुहैया कराता था, गैस की कमी के कारण बंद होने की कगार पर है। ढाबा मालिक मलखान ने बताया कि रोजाना दो कमर्शियल सिलेंडर की खपत होती थी, लेकिन सप्लाई लगभग बंद हो गई है। उनके पास फिलहाल केवल एक सिलिंडर बचा है। अगर जल्द नया सिलिंडर नहीं मिला तो उन्हें ढाबा बंद करना पड़ेगा।
खाने-पीने की कीमतों में वृद्धि
गैस की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे ग्राहकों पर भी दिखाई देने लगा है। कई होटल और ढाबों ने चाय, रोटी, सब्जी और स्नैक्स समेत खाने के दाम बढ़ा दिए हैं। कई जगहों पर कीमतें 10-20 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। द्वारका मोड़ इलाके में एक रेस्तरां ने रोटी के दाम में दो रुपये की बढ़ोतरी की। होटल संचालकों का कहना है कि गैस महंगी होने के कारण मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं।
आम लोगों पर असर
गैस संकट का प्रभाव केवल व्यवसायों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजाना बाहर खाने वाले ग्राहकों की जेब पर भी पड़ा है। बुलंदशहर निवासी रोहित ने बताया कि वह रोज ऑफिस के लिए बाहर खाना खाते हैं। अब ढाबे बंद या महंगे होने से उन्हें महंगे रेस्टोरेंट में खाना पड़ेगा या घर खुद खाना बनाना पड़ेगा। ऑटो चालक विजय ने बताया कि आसपास के कई ढाबों और स्टॉलों में दाम बढ़ गए हैं। पहले 70-80 रुपये में भरपेट खाना मिलता था, अब 100-120 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
इस तरह, एलपीजी गैस की कमी न केवल छोटे और बड़े कारोबारियों के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि आम लोगों के रोजमर्रा के खर्च को भी सीधे प्रभावित कर रही है।