हिसार की रहने वाली यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपों से जुड़े मामले में फिलहाल जेल में ही रहना होगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिससे करीब दस महीने बाद रिहाई की उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।

इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। ज्योति की ओर से अदालत में कहा गया कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। साथ ही उन्होंने अदालत से अपनी व्हाट्सएप चैट का रिकॉर्ड मंगाने का अनुरोध किया था। इस पर अदालत ने जांच अधिकारी को संबंधित रिकॉर्ड के साथ पेश होने का निर्देश दिया था।

मामले के अनुसार, ज्योति मई 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। एफआईआर में कहा गया है कि यह कार्रवाई खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। आरोप है कि वर्ष 2023 में जब वह नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में वीजा के लिए गई थीं, तब उनकी मुलाकात पाकिस्तानी अधिकारी अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसके बाद भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने की आशंका सामने आई।

अपनी याचिका में ज्योति ने खुद को एक ट्रैवल ब्लॉगर बताते हुए कहा कि वह खुले तौर पर कैमरे के साथ कंटेंट बनाती हैं और उसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपलोड करती हैं। उनके मुताबिक ऐसे व्यक्ति को जासूस बताना तर्कसंगत नहीं है।

उनके वकील रविंद्र सिंह ढुल ने अदालत में दलील दी कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत जिन शर्तों को पूरा होना चाहिए, जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करना या संवेदनशील स्थानों के स्केच या मॉडल तैयार करना, वे इस मामले में लागू नहीं होतीं।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 का इस्तेमाल उचित नहीं है, क्योंकि कथित घटना 2023 की है, जबकि नई दंड संहिता बाद में लागू हुई। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच रिकॉर्ड में ऐसा कोई कॉल या संदेश नहीं मिला है जो ज्योति और संबंधित पाकिस्तानी अधिकारी के बीच सीधे संपर्क को साबित करे।

जमानत याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि ज्योति अपने परिवार में बुजुर्ग पिता और बीमार ताऊ की देखभाल करने वाली एकमात्र सदस्य हैं। दोनों उम्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद अदालत ने फिलहाल उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया।