अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो झील के तट पर सामूहिक योगाभ्यास कर फिटनेस और मानसिक दृढ़ता का अनूठा संदेश दिया। समुद्र तल से करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर आयोजित यह कार्यक्रम देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और दुर्गम क्षेत्रों में से एक में संपन्न हुआ।

आईटीबीपी की 47वीं बटालियन की ओर से आयोजित इस विशेष योग सत्र में ‘हिमवीरों’ ने उत्साह के साथ भाग लिया। बर्फीली हवाओं, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्र में योगाभ्यास कर जवानों ने अपनी शारीरिक क्षमता और मानसिक संतुलन का परिचय दिया।

पैंगोंग त्सो झील लगभग 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे दुनिया के सबसे कठिन परिचालन क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे वातावरण में आयोजित योग कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।

आईटीबीपी के अनुसार, योग जवानों की दैनिक दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात सुरक्षाकर्मी विषम मौसम और कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभाते हैं, ऐसे में योग उन्हें शारीरिक रूप से फिट, मानसिक रूप से मजबूत और तनावमुक्त बनाए रखने में मदद करता है।

बल पिछले कई वर्षों से सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों में योग कार्यक्रम आयोजित करता आ रहा है। इससे पहले भी आईटीबीपी के जवानों को 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में योग करते देखा गया है। इन आयोजनों का उद्देश्य न केवल फिटनेस को बढ़ावा देना है, बल्कि भारतीय योग परंपरा के महत्व को भी वैश्विक स्तर पर रेखांकित करना है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2014 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता दिए जाने के बाद हर वर्ष 21 जून को इसे विश्वभर में मनाया जाता है। इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग’ रखी गई है। देशभर में विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों के बीच लद्दाख में आईटीबीपी जवानों का यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।