राजौरी जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में इन दिनों लगी भीषण आग ने हालात गंभीर कर दिए हैं। लगातार फैल रही इस आग ने न केवल वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचाया है, बल्कि वन्यजीवों और पक्षियों के जीवन पर भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। कई इलाकों में धुएं के घने गुबार दूर तक दिखाई दे रहे हैं और आग की लपटें अब रिहायशी क्षेत्रों के करीब पहुंचने लगी हैं।
पिछले कई दिनों से दस्सल, मेयाड़ी, नगून, केरी, डूंगी, रछवा, चिंगस, पोठा, धंगार, केसर गाला और पलमा जैसे कई वन क्षेत्रों में आग की घटनाएं लगातार जारी हैं। तेज गर्मी और सूखी वनस्पति के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे बड़े हिस्से में जंगल प्रभावित हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय आग और अधिक भयानक रूप ले लेती है, जिससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल बन गया है।
आग अब रिहायशी इलाकों के करीब
स्थानीय लोगों के अनुसार, जंगलों में लगी आग अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। धुएं और गर्म हवाओं के कारण लोगों को घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि लगातार फैल रहे धुएं और राख के कारण वातावरण प्रदूषित हो गया है और सांस संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि आग के कारण क्षेत्र का तापमान भी असामान्य रूप से बढ़ गया है।
वन्यजीवों पर बड़ा संकट
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इस आग से सबसे अधिक नुकसान वन्यजीवों को हो रहा है। छोटे जीव-जंतु, पक्षी और सरीसृप आग की चपेट में आकर प्रभावित हो रहे हैं। कई जानवर सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है।
वन विभाग कर रहा प्रयास, संसाधनों की कमी बनी चुनौती
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेज हवाएं, सूखी घास और गर्म मौसम आग के तेजी से फैलने के प्रमुख कारण हैं। विभाग की टीमें लगातार मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के कारण राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है।
वन सुरक्षा बल के एक अधिकारी के अनुसार, जहां से भी आग की सूचना मिलती है, वहां तुरंत टीम भेजी जाती है। कई स्थानों पर वाहन न पहुंच पाने के कारण कर्मचारियों को पैदल रास्तों से जाना पड़ता है और पारंपरिक तरीकों से आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है।
स्थानीय लोग भी कर रहे मदद
अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान में स्थानीय लोग भी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। गांवों के युवा और सामाजिक संगठन वन विभाग की टीमों के साथ मिलकर आग बुझाने में मदद कर रहे हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों के आसपास आग न जलाएं और किसी भी घटना की तुरंत सूचना दें।
पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की आग केवल पेड़ों को ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती है। इससे मिट्टी की उर्वरता घटती है, जल स्रोत प्रभावित होते हैं और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहीं तो इसका असर जलवायु पर भी पड़ेगा और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि होगी।
फिलहाल वन विभाग की टीमें लगातार आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराकर आग पर नियंत्रण पाया जाएगा ताकि वन संपदा और वन्यजीवों को और नुकसान से बचाया जा सके।