जमशेदपुर में झारखंड हाईकोर्ट ने सोनारी आशियाना गार्डन निवासी व्यवसायी विमल कुमार अग्रवाल और उनके पुत्र प्रतीक अग्रवाल को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने उनके खिलाफ सोनारी थाना कांड संख्या 45/2025 और संबंधित जीआर संख्या 966/2025 को रद्द करने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया और पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

निवेश विवाद से जुड़ा था मामला

यह मामला बिष्टुपुर निवासी शंकर लाल गुप्ता की शिकायत से संबंधित था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मेसर्स श्री नरसिंग कंस्ट्रक्शन के संचालक विमल अग्रवाल और उनके पुत्र प्रतीक अग्रवाल ने रेलवे परियोजनाओं में निवेश के नाम पर लगभग 1.91 करोड़ रुपये का गबन किया।

शिकायत के अनुसार, वर्ष 2017 में दोनों पक्षों के बीच रेलवे ठेकों में निवेश को लेकर समझौता हुआ था, जिसमें लाभ का एक निश्चित हिस्सा देने का आश्वासन दिया गया था।

अलग-अलग किश्तों में भुगतान का दावा

शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उन्होंने जनवरी से दिसंबर 2017 के बीच विभिन्न किस्तों में करीब 1.62 करोड़ रुपये का निवेश किया था। बाद में अतिरिक्त लाभ का हवाला देकर और धनराशि ली गई, जिससे कुल राशि लगभग 1.91 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

बचाव पक्ष का तर्क

निचली अदालत में आरोपी पक्ष की ओर से यह दलील दी गई थी कि यह मामला पुराना है और शिकायतकर्ता को लगभग 1.73 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। इसी आधार पर उन्हें पहले जमानत भी मिल चुकी थी।

हाईकोर्ट का अहम फैसला

याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर क्रिमिनल मिस पिटीशन पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि यह विवाद मूल रूप से सिविल प्रकृति का है और इसे आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।