रांची। पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा को सबसे अधिक अधिकार संपन्न इकाई के रूप में स्थापित किया गया है। नियमों के अनुसार ग्राम सभा की किसी विशेष बैठक से पहले संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र में इसकी सूचना सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा की जाएगी। साथ ही ढोल-नगाड़े या डुगडुगी बजाकर ग्रामीणों को बैठक की जानकारी देना अनिवार्य होगा, ताकि अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

यदि ग्राम सभा अध्यक्ष का पद किसी कारणवश रिक्त हो जाता है, तो एक माह के भीतर नए अध्यक्ष का चयन करना जरूरी होगा। अध्यक्ष की मृत्यु, त्यागपत्र या अन्य किसी वजह से पद खाली होने की स्थिति में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार चुनाव या मनोनयन किया जाएगा। नए अध्यक्ष के चयन की सूचना 10 दिनों के भीतर प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-सचिव पंचायत समिति, जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी तथा जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त को लिखित रूप में देना अनिवार्य किया गया है।

एक वर्ष के लिए सहायक सचिव की व्यवस्था

नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि ग्राम सभा अपने सदस्यों में से एक सहायक सचिव का चयन कर सकती है। इसके अलावा पहले से चयनित पंचायत सहायक की सेवाएं भी सहायक सचिव के रूप में ली जा सकती हैं। ग्राम सभा अपनी आवश्यकता के अनुसार सहायक सचिव की जिम्मेदारियां तय करेगी।

सहायक सचिव की नियुक्ति एक वर्ष के लिए होगी, हालांकि उसे दोबारा नियुक्त किए जाने का प्रावधान भी रखा गया है। चयन के दौरान महिलाओं को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है।

बहुमत से हटाया जा सकेगा सहायक सचिव

यदि ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम सभा की बैठक में अध्यक्ष द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करता है, जो झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के अंतर्गत आते हैं, तो अध्यक्ष पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी से उस पर नियंत्रण की मांग कर सकती है।

इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा पंचायत कार्यों की जांच के दौरान ग्राम सभा अध्यक्ष जांच अधिकारी के समक्ष लिखित रूप में अपनी समस्याएं और कार्य में आ रही बाधाओं को रख सकता है। जांच अधिकारी लोकहित में आवश्यक ऐसे कार्यों के निष्पादन का निर्देश दे सकता है, जिन्हें पंचायत द्वारा पूरा नहीं किया जा रहा हो।

अशोभनीय व्यवहार पर सख्त कार्रवाई

ग्राम सभा की बैठक में यदि कोई सदस्य अनुशासनहीनता करता है, आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करता है और चेतावनी के बावजूद माफी मांगने से इनकार करता है, तो उसे व्यवस्था भंग करने का दोषी माना जाएगा। ऐसी स्थिति में अध्यक्ष को अधिकार होगा कि वह उस सदस्य को तत्काल बैठक से बाहर जाने का निर्देश दे। आदेश मिलने पर संबंधित सदस्य को उसी दिन की शेष बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।