नई दिल्ली। भारत सरकार ने झारखंड आंदोलन के महानायक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उनके लोक कल्याण और सामाजिक सेवा में असाधारण योगदान को मान्यता देने के लिए दिया जा रहा है।
शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए लगातार संघर्ष किया। उनके योगदान को न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
उनके बेटे और जेएमएम विधायक बसंत सोरेन ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह केंद्र सरकार के इस निर्णय के लिए आभारी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि शिबू सोरेन को भारत रत्न से भी सम्मानित किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
पूर्व उपमुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि पद्मभूषण सम्मान मिलना झारखंड के हर नागरिक के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इसे झारखंड की मिट्टी, संघर्ष की परंपरा और जनआंदोलन की भावना का सम्मान बताया।
JMM सांसद महुआ माजी ने कहा कि शिबू सोरेन का कद इतना ऊंचा था कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान भारत रत्न ही हो सकता था। पद्मभूषण मिलने पर उन्होंने खुशी जताई, लेकिन भारत रत्न की उम्मीद न पूरी होने पर थोड़ी निराशा भी व्यक्त की।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण मिलने का निर्णय सही दिशा में कदम है।
झारखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि शिबू सोरेन को पद्मभूषण देना सराहनीय है, लेकिन देश और दुनिया में उन्हें भारत रत्न का दर्जा मिलना चाहिए। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव बिनोद पाण्डेय ने भी कहा कि शिबू सोरेन भारत रत्न के हकदार थे।
स्थानीय जनप्रतिनिधि, खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड उप प्रमुख अरुण साबू, ने कहा कि शिबू सोरेन न केवल भारत में बल्कि विदेशों के आदिवासियों में भी लोकप्रिय नेता रहे हैं और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।