जमशेदपुर में मंगलवार की सुबह एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई। 24 वर्षीय युवा उद्योगपति कैरव गांधी, जिनका 14 दिन पहले अपहरण कर लिया गया था, उन्हें पुलिस की विशेष टीम ने सुरक्षित उनके सर्किट हाउस क्षेत्र स्थित घर पर पहुंचाया। उनकी सुरक्षित वापसी से परिवार और शहर के व्यापारी वर्ग ने बड़ी राहत की सांस ली।

भारी पुलिस सुरक्षा के बीच घर लौटे कैरव को उनके पिता देवांग गांधी और अन्य परिजनों ने गले लगाया।अपहरण का रहस्य

कैरव का अपहरण 13 जनवरी को हुआ था, जब वह बिष्टुपुर स्थित अपने घर से सुबह एसबीआई बैंक और फिर आदित्यपुर की फैक्ट्री जाने निकले थे। दोपहर तक न तो फैक्ट्री पहुँचे और न ही घर लौटे। उनका मोबाइल फोन बंद आ रहा था। उसी दिन शाम को उनकी कार चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा (NH-33 के किनारे) लावारिस हालत में मिली। कार की इग्निशन ऑन थी और मोबाइल पास में जमीन पर पड़ा था।

विदेशी नंबर से मांगी गई फिरौती
जांच में पता चला कि अपहरणकर्ताओं ने परिवार को इंडोनेशियाई नंबर (+62) से व्हाट्सएप कॉल कर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगने की कोशिश की। उन्हें पुलिस को सूचित करने से मना किया गया।

पुलिस की कार्रवाई
जमशेदपुर पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में 7 विशेष जांच दलों का गठन किया। जांच का दायरा झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैलाया गया। CCTV फुटेज में संदिग्ध सफेद स्कॉर्पियो और एक हैचबैक कार दिखाई दी, जिसका इस्तेमाल अपहरणकर्ताओं ने निगरानी के लिए किया था।

राजनीतिक दबाव और जनआक्रोश
कैरव की बरामदगी में देरी से शहर में आक्रोश बढ़ा। भाजपा नेताओं, विधायक सरयू राय सहित व्यापारिक संगठनोंने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। लगातार छापेमारी और दबाव के चलते अपहरणकर्ताओं ने अंततः घुटने टेक दिए।

हालांकि, पुलिस ने अब तक गिरफ्तारी और फिरौती का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। पुलिस जल्द ही मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है।

कैरव गांधी अपहरण का समय-सारिणी:

  • 13 जनवरी: सुबह 11:30 बजे कैरव घर से निकले; कार NH-33 किनारे मिली।

  • 13 जनवरी (शाम): परिवार को 5 करोड़ रुपये की फिरौती का व्हाट्सएप कॉल।

  • 14 जनवरी: पुलिस ने जांच तेज की; CCTV फुटेज और अंतिम मोबाइल लोकेशन मिली।

  • 15–21 जनवरी: 7 विशेष टीमों द्वारा जांच, SIT गठित, इंटर-स्टेट रेड, हनी ट्रैप एंगल सामने आया।

  • 22 जनवरी: बिहार कनेक्शन पर जांच केंद्रित।

  • 25 जनवरी: संदिग्ध स्विफ्ट कार बरामद; बिहार लिंक पुख्ता।

  • 27 जनवरी: सुबह 4:30 बजे कैरव सुरक्षित घर पहुंचे; शहर में राहत की लहर।