रांची। झारखंड में पुलिस कर्मियों के वेतन से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी का मामला अब और जिलों में फैलता नजर आ रहा है। बोकारो और हजारीबाग के बाद अब पलामू जिले में भी इसी तरह की अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
📌 सरकार ने दिए राज्यव्यापी जांच के आदेश
स्थिति को गंभीर मानते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने वित्त सचिव को पूरे मामले की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जिलों में कोषागार और लेखा व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा गया है।
उन्होंने गृह सचिव और डीजीपी से भी अपने स्तर पर यह जांच करने को कहा है कि विभिन्न जिलों में लेखा कर्मियों की तैनाती कितने वर्षों से एक ही स्थान पर है।
📊 पलामू मामले पर डीसी से रिपोर्ट तलब
पलामू में सामने आए नए मामले को लेकर उपायुक्त से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
वित्त मंत्री ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि बोकारो और हजारीबाग में चल रही जांच के दौरान अवैध निकासी की राशि लगातार बढ़ती जा रही है।
🔍 तीन जिलों में पहले ही सामने आ चुके हैं मामले
सबसे पहले महालेखाकार (AG) की रिपोर्ट के आधार पर बोकारो में गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद हजारीबाग में भी इसी तरह की अनियमितताओं का खुलासा हुआ। अब पलामू में मामला सामने आने से प्रशासनिक चिंता और बढ़ गई है।
तीनों मामलों का संबंध पुलिस विभाग से जुड़ा बताया जा रहा है।
⚠️ राज्यव्यापी नेटवर्क की आशंका
वित्त मंत्री ने आशंका जताई है कि यह गड़बड़ी सिर्फ इन जिलों तक सीमित नहीं हो सकती और अन्य जिलों में भी ऐसी अनियमितताएं हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह संभव है कि इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या सिंडिकेट सक्रिय हो, जो कोषागार प्रणाली की खामियों का फायदा उठा रहा हो।
🧾 दो तरह की गड़बड़ियों की जांच जरूरी
मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि जांच दो स्तरों पर होनी चाहिए—
पहला, प्रणालीगत खामियों का फायदा उठाकर की गई अवैध निकासी।
दूसरा, जानबूझकर किया गया आपराधिक कृत्य।
🏛️ DDO की भूमिका पर भी सवाल
वित्त मंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि अब तक निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान और बजट उपयोग की पूरी जानकारी DDO के पास होती है और नियमों के अनुसार उन्हें प्रमाणित करना होता है कि भुगतान सही और नियमानुसार है।
इस प्रमाणन के बाद ही कोषागार से भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ती है, ऐसे में किसी भी अनियमितता की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।