साहिबगंज। शहर के पूर्वी और पश्चिमी फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण समेत अन्य मांगों को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय प्रवक्ता पंकज मिश्रा के नेतृत्व में शुरू आंदोलन का असर स्थानीय व्यापार पर साफ दिखने लगा है। 5 जनवरी से पत्थर व्यवसायियों ने नए इंडेंट नहीं लगाने और 16 जनवरी से रेलवे के माध्यम से पत्थर ढुलाई रोकने की चेतावनी दी थी।

सोमवार को पुराने इंडेंट के जरिए कुछ पत्थर की ढुलाई हुई, लेकिन शाम 3:30 बजे तक केवल आधा दर्जन व्यवसायियों ने ही इंडेंट भरा। सामान्य दिनों में यह संख्या 20-25 रहती है। बरहड़वा के रेलवे साइडिंगों से एक भी नया इंडेंट नहीं आया, जबकि करमटोला, मिर्जाचौकी, सकरीगली और बाकुड़ी से इंडेंट दर्ज हुआ।

उधर, पाकुड़ के करीब आधा दर्जन पत्थर कारोबारी सोमवार को पंकज मिश्रा से मिलने पार्टी कार्यालय पहुंचे और आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मांगों के समर्थन में वे भी रेलवे के माध्यम से अपना पत्थर नहीं भेजेंगे। पाकुड़ के व्यवसायियों ने यह भी कहा कि कई ट्रेनें वहां से गुजरती हैं, लेकिन रुकती नहीं हैं। इसके बावजूद रेलवे को पाकुड़ से अच्छा खासा राजस्व मिलता है, लेकिन स्थानीय लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। यात्रियों को एक्सप्रेस ट्रेनों से सफर करने के लिए बरहड़वा या मालदा जाना पड़ता है।

पंकज मिश्रा ने कहा कि रेलवे की यह दोहरी नीति अब स्वीकार्य नहीं होगी। यदि रेलवे को यहां से राजस्व लेना है, तो जनता को सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी। उन्होंने बताया कि हावड़ा इंटरसिटी में एक एसी बोगी जोड़ी गई है और वर्धमान पैसेंजर ट्रेन का विस्तार साहिबगंज तक किया गया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि पूर्वी और पश्चिमी फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण का टेंडर होने तथा रांची के लिए ट्रेन परिचालन शुरू होने तक रेलवे से किसी भी बातचीत में प्रगति नहीं होगी।

पंकज मिश्रा ने स्पष्ट किया कि साहिबगंज की जनता अब जाग चुकी है और वह अपने हक और अधिकार सुनिश्चित करेगी। इस मौके पर पाकुड़ के व्यवसायी अजय कुमार, सुखेन मंडल, महेश लोधवानी, संजय गुप्ता, सजल, उज्जवल घोष और मिलन पांडेय समेत अन्य उपस्थित थे।