भोपाल में आयोजित किसान महाचौपाल में कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे निशाना साधा और उन्हें तानाशाही रवैये वाला बताया। उन्होंने कहा कि अपने 54 वर्षों के राजनीतिक अनुभव में उन्होंने ऐसा प्रधानमंत्री कभी नहीं देखा, जो लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज दबाने में जुटा हो।
नाम बदलने पर व्यंग्य
खरगे ने प्रधानमंत्री पर व्यंग्य करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में योजनाओं, संस्थानों और सड़कों के नाम बदलने का सिलसिला चल रहा है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि मोदीजी खुद कांग्रेस राज में पैदा हुए हैं, तो शायद उन्हें अपना नाम भी बदल लेना चाहिए।
किसानों के हितों पर चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसानों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस समझौते से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से पहले भारत को व्यापारिक लाभ होता था, लेकिन अब किसानों के हितों की अनदेखी हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे-छोटे देश अपने किसानों के लिए सख्त रुख अपनाते हैं, लेकिन मोदी सरकार अमेरिका के सामने मजबूती से बात नहीं कर पा रही।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और ट्रंप का उदाहरण
अपने भाषण में खरगे ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री हर मुद्दे पर अमेरिका के सामने ‘यस सर’ कहने में लगे रहते हैं। तेल खरीद और व्यापार नीतियों को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर झुकने का आरोप लगाया।
खरगे ने कथित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर फैसले लिए, जो गलत साबित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते हैं और सीधे सवालों का जवाब नहीं देते।
कार्यकर्ताओं को संघर्ष का संदेश
कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि डरने की बजाय संविधान और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखना होगा। उन्होंने बताया कि अमेरिका में केवल 3 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं, जबकि भारत में बड़ी आबादी कृषि पर आधारित है। ऐसे में किसानों के हितों से समझौता देश के लिए घातक हो सकता है।
भोपाल की किसान महाचौपाल से कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर अभियान तेज करेगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बनेगा।