भागीरथपुरा दूषित पेयजल संकट को दो महीने हो गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का नल के पानी पर भरोसा अब भी नहीं लौट सका है। कई परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होने के बावजूद अपने घरों में आरओ सिस्टम लगवा चुके हैं या रोज़ाना 25 रुपये का बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं। हालांकि अब कुछ इलाकों में नर्मदा जल साफ आना शुरू हो गया है, लेकिन दुकानों में ग्राहकी अभी भी पहले जैसी नहीं हुई है। खाने-पीने की दुकानों के व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय बस्ती के लोग तो आ रहे हैं, लेकिन आस-पड़ोस की बस्तियों से ग्राहक अभी तक लौटे नहीं हैं।
सड़कों का हाल भी खराब
भागीरथपुरा बस्ती के मुख्य मार्ग पर नई पाइपलाइन डालने के कारण सड़क और गलियां दोनों जगह खुदाई की गई। परिणामस्वरूप, सड़कें ऊबड़-खाबड़ हो गई हैं और गलियों में सीमेंट की परतें भी टूट गई हैं। निवासी चिंतित हैं कि अगर वर्षा शुरू होने से पहले सड़कें ठीक नहीं की गईं, तो वाहनों के दबाव से चैंबर फिर से टूट सकते हैं।
ग्राहक पानी के भरोसे से कतराने लगे
चाय और नाश्ते की दुकानों पर ग्राहक अक्सर पानी के बारे में पूछते हैं। दुकानदारों के अनुसार, लोग दुकान का पानी पीने से परहेज कर रहे हैं और बोतलबंद पानी खरीदना पसंद कर रहे हैं। स्थानीय निवासी रमेश मंडावरा ने कहा कि लोगों का नल के पानी पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है।
सिर्फ बाहरी लोग ही नहीं, बस्ती के कई निवासी भी नल का पानी सीधे नहीं पीते। इसका असर मकानों की भाड़े की मांग पर भी पड़ा है। पहले इंडस्ट्रियल एरिया के पास होने के कारण कमरे आसानी से किराए पर मिल जाते थे और अच्छी कीमत मिलती थी, लेकिन अब लोग भागीरथपुरा में कमरे लेने से बच रहे हैं।
भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है और डेढ़ हजार से अधिक लोग बीमार पड़े थे, जिनमें कई को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा था।