महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जहां शिवसेना (यूबीटी) में अंदरूनी टूट की स्थिति को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुंबई में रविवार को आयोजित एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ऑपरेशन टाइगर सफल हो चुका है” और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने हल्के अंदाज में यह भी कहा कि “ऑपरेशन सफल है और बॉडी पूरी तरह स्वस्थ है।” साथ ही उन्होंने उद्धव ठाकरे को आत्ममंथन करने की सलाह दी।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहे। शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वह जिस भी काम को हाथ में लेते हैं, उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गुट में अंदरूनी असंतोष और विरोधाभास की स्थिति बनी हुई है। शिंदे ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ बयानबाजी करने के बाद वही लोग दोबारा वापसी की उम्मीद करते हैं, जिसे उन्होंने “केमिकल लोचा” करार दिया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस मामले में और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि 17 जून को हुई शिवसेना (यूबीटी) सांसदों की बैठक से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें छह सांसद अनुपस्थित रहे थे। इनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल आष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर के नाम शामिल हैं। तभी से इनके शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं।

वर्तमान में शिवसेना (यूबीटी) के पास लोकसभा में कुल नौ सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी गुट को वैध मान्यता के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है, जो इस स्थिति में छह सांसदों के बराबर है। रविवार को इनमें से दो सांसदों के शिंदे खेमे में जाने की पुष्टि के बाद राजनीतिक समीकरण और तेज हो गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि असली शिवसेना का नेतृत्व एकनाथ शिंदे ही कर रहे हैं, जिनके पास पार्टी का धनुष-बाण चुनाव चिन्ह है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फडणवीस ने राज्य की ‘लाडकी बहिन योजना’ को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने बताया कि योजना की शुरुआत सेल्फ-सर्टिफिकेशन के आधार पर हुई थी, लेकिन बाद में इनकम टैक्स और आरटीओ डेटा के जरिए जांच की गई, जिसमें कई लाभार्थी अपात्र पाए गए। जांच में सामने आया कि कुछ लोग आयकरदाता थे और कुछ के पास चार पहिया वाहन भी थे, जबकि कुछ मामलों में एक ही परिवार की कई महिलाओं द्वारा लाभ लिया जा रहा था, जो नियमों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि केवल अपात्र लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए गए हैं।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने किसान कर्ज माफी योजना पर भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य संकटग्रस्त किसानों को दोबारा बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो किसान समय पर ऋण चुकाते हैं, उनके साथ अन्याय न हो। उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा लगाई गई शर्तें पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की योजनाओं की तुलना में अधिक व्यावहारिक और सरल हैं, जिससे बैंकिंग व्यवस्था भी मजबूत होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।