उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने रविवार को स्पष्ट कर दिया कि वह अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जुड़ गए हैं। पिछले कुछ दिनों से उनके पाला बदलने की चर्चाएं तेज थीं, जिन पर उन्होंने अब सार्वजनिक रूप से स्थिति साफ की है।

सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा नहीं बदली है, बल्कि “एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना” में शामिल हुए हैं। आष्टीकर के अनुसार, 18 जून तक वे और कुछ अन्य सांसद किसी निर्णय पर नहीं पहुंचे थे, लेकिन बाद में हुई कुछ टिप्पणियों ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया।

संजय राउत पर अप्रत्यक्ष निशाना

हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनका इशारा शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की ओर था। राउत ने हाल ही में बागी सांसदों पर तीखी टिप्पणी करते हुए ‘ऑपरेशन तुड़वा’ जैसी चेतावनी दी थी।

आष्टीकर ने कहा कि असहमति जताना हर किसी का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक बयान देते समय भाषा की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

विकास कार्यों में फंड की कमी का आरोप

सांसद ने पार्टी छोड़ने के पीछे विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध न होने को भी एक प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहने के कारण उनके क्षेत्र में विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही थीं।

उन्होंने यह भी कहा कि सांसद निधि के रूप में मिलने वाली राशि सीमित है और पिछले दो वर्षों में प्रयासों के बावजूद अतिरिक्त फंड नहीं मिल सका, जिससे क्षेत्रीय विकास कार्य बाधित हुए।

“जनता की सेवा पहली प्राथमिकता”

नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि जनता ने उन पर भरोसा जताया है और उनकी जिम्मेदारी क्षेत्र का विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे आगे भी अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करते रहेंगे।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके फैसले से कुछ लोग असंतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति को समझा जाएगा। उनके अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में यह निर्णय लेना उनके लिए अनिवार्य हो गया था।

पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 17 जून को दिल्ली में हुई शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में नागेश पाटिल आष्टीकर समेत कई सांसद अनुपस्थित रहे थे। इसके बाद से ही उनके शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं।

शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा में वर्तमान में नौ सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एक साथ कई सांसद दल बदलते हैं, तो दल-बदल कानून से जुड़े प्रावधानों के तहत यह मामला और जटिल हो सकता है।