मुंबई में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) के 60वें स्थापना दिवस समारोह में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विरोधियों और राजनीतिक अटकलों पर कड़ा जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के विलय की खबरें पूरी तरह निराधार हैं।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब उनकी पार्टी ने दशकों पुराने गठबंधन के बावजूद भाजपा के साथ विलय नहीं किया, तो कांग्रेस के साथ ऐसा कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिवसेना अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ आगे बढ़ती रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे भावुक भी नजर आए। उन्होंने हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और छह लोकसभा सांसदों के कथित बगावत के बीच कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद उनका संकल्प मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी कार्यकर्ताओं को लगे कि वे इस जिम्मेदारी के योग्य नहीं हैं, तो वे पद छोड़ने को भी तैयार हैं।
भाजपा और कांग्रेस की तुलना करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस के साथ विचारधारात्मक मतभेद जरूर रहे हैं, लेकिन उसने कभी शिवसेना को खत्म करने की कोशिश नहीं की, जबकि भाजपा पर उन्होंने पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया।
सांसदों की कथित बगावत को लेकर उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि इससे शिवसैनिकों में हताशा नहीं, बल्कि और अधिक मजबूती आई है। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता अब पहले से ज्यादा एकजुट और आक्रामक हैं।
भाषण के दौरान उन्होंने भावुक होकर 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना उम्मीदवारों को वोट देने वाले मतदाताओं से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन प्रतिनिधियों पर भरोसा जताया, उन्होंने विश्वास तोड़ा है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने लोकतंत्र को लेकर चिंता जताई और कहा कि देश को एकदलीय व्यवस्था की ओर धकेलने की कोशिशें खतरनाक हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया।
साथ ही उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सक्रियता और जनता से जुड़ाव पर सवाल उठाने वाले यह भूल जाते हैं कि हाल के चुनावों में शिवसेना ने अच्छा प्रदर्शन किया है।