चंडीगढ़। पंजाब के वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की सल्फास खाकर आत्महत्या की घटना के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद है और किसी व्यक्ति का इस तरह जीवन समाप्त कर देना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने मृतक के परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री से इस्तीफा लेना इसलिए जरूरी था ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार का दबाव या प्रभाव न पड़े और मामले की सच्चाई सामने आ सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी तरह की लापरवाही या दबाव की संस्कृति को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो अधिकारियों या कर्मचारियों को आत्महत्या जैसी स्थिति में डाल सके।

जांच में किया जाएगा हर पहलू का आकलन

मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि पूरी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।

गगनदीप सिंह रंधावा अमृतसर जिले में तैनात थे। उन्होंने सल्फास खाने से पहले एक वीडियो में मंत्री लालजीत भुल्लर पर मानसिक और शारीरिक दबाव डालने के आरोप लगाए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गोदाम निर्माण से जुड़े टेंडर को लेकर मंत्री भुल्लर ने रंधावा पर दबाव बनाया था।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

वहीं, कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के नेताओं ने इस मामले पर सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा ने मंत्री भुल्लर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग की। अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।

मजीठिया ने आरोप लगाया कि रंधावा को लंबे समय से दबाव में रखा गया था, लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कहा कि अगर समय पर उचित कार्रवाई होती तो शायद रंधावा आज जीवित होते।

इससे पहले, भ्रष्टाचार के आरोप में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. विजय सिंगला का इस्तीफा लिया गया था, जबकि अन्य कैबिनेट मंत्रियों को भी हटाया जा चुका है।