युवक उपेंद्र बीनारायण गेट के पास भरतपुर नर्सिंग होम वाली गली में रहता था। उपेंद्र के पड़ोसी अर्जुन का मकान निर्माण का काम चल रहा था। उसके घर पर दो बजरी माफिया चंबल की अवैध बजरी डालने आये थे। उसमें से एक बजरी माफिया बजरी खाली करके ट्रैक्टर ट्रॉली को बैक कर रहा था, तभी अचानक उपेंद्र के घर का पाइप टूट गया। जिस पर उपेंद्र के परिजन घर बाहर आ गए और दोनों ट्रैक्टर ट्रॉली के ड्राइवरों को रोक लिया।

उपेंद्र के परिजन ट्रैक्टर ट्रॉली वालों से बात कर रहे थे, इतने में आगे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली का ड्राइवर ट्रैक्टर ट्रॉली को लेकर भागा। उसके पीछे दूसरी ट्रैक्टर ट्रॉली जिसने उपेंद्र के घर का पाइप तोड़ा था, वह भी भागा, तभी उपेंद्र और उसके परिजन ट्रैक्टर ट्रॉली के ड्राइवर को पकड़ने के लिए लपके। इस दौरान अचानक उपेंद्र अचानक गिर गया और ट्रैक्टर ट्रॉली का ड्राइवर उपेंद्र की छाती और सिर से ट्रैक्टर ट्रॉली का पहिया चढ़ाते हुए वहां से फरार हो गया। जिसके बाद तुरंत उपेंद्र के परिजनों ने उसे उठाया और आरबीएम अस्पताल ले गए। जहां उपेंद्र को मृत घोषित कर दिया। 


रोक के बाद बजरी माफिया सीधे पहुंचे बजरी डालने
दरअसल, चंबल की बजरी पर रोक है। उसके बाद बजरी माफिया लगातार भरतपुर में बजरी ला रहे हैं। कई बार जब पुलिस ने बजरी माफियाओं को रोकने की कोशिश की है तो, बजरी माफिया पुलिस पर भी हमला करने से नहीं चूकते। बड़ी बात यह है जब चंबल की बजरी पर रोक है, उसके बाद भी चंबल की बजरी शहर के अंदर तक कैसे आई और पुलिस की नजर से कैसे बची ये एक बड़ा सवाल है, फिलहाल परिजनों में आक्रोश है।