राजस्थान हाईकोर्ट ने जल जीवन मिशन में कथित घोटाले के मामले में ईडी और राज्य सरकार को पूरी जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। बुधवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता, पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी, अभिनव भंडारी और डॉ. टी.एन. शर्मा ने मामले की प्रगति पर गंभीर आपत्ति जताई।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, लेकिन सरकार ने केवल दो फर्मों के मामलों में ही एफआईआर दर्ज की है। जबकि उनके अनुसार जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, मांगीलाल बिश्नोई और ओम इंफ्रा जैसी कई अन्य संस्थाओं के मामले भी शिकायत के तहत सामने आए थे। इन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है और प्रभावशाली आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास ने कोर्ट को बताया कि कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने बताया कि यह कार्रवाई केवल दो मामलो तक सीमित रही और बड़ी मछलियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि सरकार को कई बार विस्तृत शिकायतें दी गईं, लेकिन जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।

सुनवाई के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा शामिल थे, ने ईडी और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सभी शिकायतों का जवाब देने के बाद मामले को तीन सप्ताह में फिर से सूचीबद्ध किया जाए।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता डॉ. टी.एन. शर्मा ने कहा कि जल जीवन मिशन में हुए बड़े घोटाले पर एसीबी केवल गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल के मामलों की जांच कर रही है, जबकि समान प्रकृति के कई अन्य मामलों पर दस्तावेज के साथ शिकायत दी गई थी। बार-बार रिमाइंडर देने के बावजूद इन मामलों में न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही जांच शुरू की गई।