आगरा में अपहरण और लूट के एक पुराने मामले में वांछित 50 हजार रुपये का इनामी आरोपी आखिरकार 25 साल बाद पुलिस की गिरफ्त में आ गया। आरोपी को पकड़ने में पुलिस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल फोरेंसिक तकनीक का सहारा लेना पड़ा, जिससे उसकी पहचान संभव हो सकी।

पुलिस के अनुसार, वेस्ट अर्जुन नगर निवासी सैमुअल वर्ष 2001 से फरार था और लगातार अपनी पहचान बदलकर अलग-अलग जगहों पर रह रहा था। लंबे समय तक उसकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही थी।

2001 से फरार, कई गंभीर मामलों में नामजद

थाना नाई की मंडी में दर्ज 2001 के एक अपहरण मामले में सैमुअल नामजद था। इसी के बाद 2002 में उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर लोहामंडी क्षेत्र में हथियारों के बल पर चंदन सिंह से 1.75 लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया था। उसके दो साथी पहले ही अदालत से सजा पा चुके हैं, लेकिन सैमुअल लगातार फरार रहा।

शुरुआत में उस पर 2,500 रुपये का इनाम घोषित था, जो समय के साथ बढ़कर 18 हजार रुपये और बाद में 50 हजार रुपये कर दिया गया।

AI से बनी पहचान, दिल्ली के चालान ने खोला सुराग

पुलिस के पास आरोपी की सिर्फ 25 साल पुरानी एक तस्वीर थी। इसी आधार पर डीसीपी सिटी सैय्यद अली अब्बास ने AI तकनीक की मदद से उसका संभावित वर्तमान चेहरा तैयार कराया।

इस फोटो को देशभर की पुलिस एजेंसियों के साथ साझा किया गया। जांच के दौरान दिल्ली में एक वाहन चालान में लगे फोटो से उसके चेहरे का मिलान हुआ। हालांकि दस्तावेजों में वह “सहदेव यादव” नाम से दर्ज था।

जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि कार किसी “पूनम” नाम की महिला के नाम पर रजिस्टर्ड है। दिलचस्प बात यह रही कि अपहरण मामले में जिस युवती का नाम था, उसका नाम भी पूनम ही था, जिससे पुलिस को बड़ा सुराग मिला।

छह महीने की निगरानी के बाद गिरफ्तारी

पुलिस ने करीब छह महीने तक दिल्ली में उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद सोमवार को उसे दिल्ली के नागलोई क्षेत्र स्थित प्रेमनगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

कई नाम, बदली पहचान और नई जिंदगी

पुलिस के मुताबिक, फरार रहने के दौरान आरोपी ने कई नाम अपनाए और अलग-अलग राज्यों में छिपकर रहा। उसने शूटिंग कोच के रूप में काम किया और हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ली।

बताया जा रहा है कि वह सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहता था, कभी अपनी तस्वीरें सार्वजनिक नहीं करता था और न ही पुराने परिचितों से संपर्क रखता था। वह अक्सर वाहन भी खुद नहीं चलाता था ताकि पहचान न हो सके।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उसकी गिरफ्तारी एक तकनीक आधारित लंबी और जटिल जांच का परिणाम है, जिसमें AI और डिजिटल ट्रैकिंग ने अहम भूमिका निभाई।