महोबा। शुक्रवार को भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को बीच सड़क पर रोककर सियासी सुर्खियों में जगह बना ली। यह घटना महोबा जिले के चरखारी क्षेत्र में तब हुई, जब मंत्री जलजीवन मिशन के जल अर्पण दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे।

विधायक राजपूत अपने समर्थकों और करीब 30-40 गांवों के प्रधानों के साथ सड़क पर पहुंच गए और मंत्री के काफिले को रोकने के लिए गाड़ियां खड़ी कर दीं। असहज स्थिति बनने पर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह अपनी कार से उतरे और विधायक ने मौके पर ही क्षेत्र की नल योजना की खराब स्थिति, सड़कें टूटी होने और जल जीवन मिशन के अधूरे काम के मुद्दों को उठाया।

स्थानीय अधिकारियों और नेताओं ने बीच-बचाव किया, और बाद में मंत्री ने विधायक को अपनी कार में बैठाकर कलेक्ट्रेट ले गए। वहां करीब एक घंटे तक बंद कमरे में बैठक चली। बैठक के बाद मंत्री वापस अपने कार्यक्रम में लौट गए, जबकि विधायक ने कहा कि अगर समस्याएं 20 दिनों में हल नहीं हुईं तो वह सीधे लखनऊ जाकर मंत्री का घेराव करेंगे।

इस घटना के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर चुटकी लेते हुए लिखा कि भाजपा के “डबल इंजन” में आपसी टकराव साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री और विधायक दोनों ही जनता के विकास के बजाय निजी स्वार्थ में लगे हैं और जनता का गुस्सा इसी वजह से सामने आ रहा है।

विधायक बृजभूषण राजपूत ने मीडिया से कहा कि उनके इलाके में नल योजना की टंकियां टपक रही हैं, सड़कें खुदी पड़ी हैं और गांवों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। उन्होंने यह भी बताया कि सदन में मामला उठाने के बावजूद अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई कर रहे हैं।

कलेक्ट्रेट में बैठक में जिलाधिकारी गजल भारद्वाज, पुलिस अधीक्षक प्रबल प्रताप सिंह, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, जिलाध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा और कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन चक्रपाणि त्रिपाठी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में विधायक ने प्रशासन से क्षेत्र की समस्याओं के निस्तारण के लिए 20 दिन का समय मांगा।

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बाद महोबा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इसे भाजपा के अंदरूनी विवाद के रूप में देखा।