बदायूं और बरेली में गंगा दशहरा के अवसर पर स्नान के दौरान बड़ा हादसा हो गया। सोमवार को गंगा घाटों पर अलग-अलग स्थानों पर 31 श्रद्धालु डूबने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें सात लोगों की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची अब भी लापता बताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि गोताखोरों और स्थानीय नाविकों ने समय रहते कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

घटना के दौरान बदायूं में जिलाधिकारी अविनाश राय और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा स्वयं गंगा घाट पर मौजूद रहीं और श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न जाने की लगातार अपील करती रहीं। इसके बावजूद कई लोग आस्था के चलते नदी के गहरे हिस्सों में चले गए, जिससे हादसे की स्थिति बन गई।

कछला घाट पर हाथरस जिले के गांव कानऊ निवासी ओमवीर अपने बेटे नीलेश और परिजनों के साथ स्नान के लिए पहुंचे थे। मुख्य घाट से करीब एक किलोमीटर दूर अलग स्थान पर स्नान के दौरान नीलेश, विकास, चार वर्षीय कृष्णा, शालिनी, शिखा और रोहित गहरे पानी में फंस गए। मौके पर मौजूद नाविकों और गोताखोरों ने तत्काल रेस्क्यू शुरू किया और विकास, कृष्णा व शालिनी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बाद में नीलेश और रोहित के शव बरामद किए गए, जबकि शिखा की तलाश देर शाम तक जारी रही। इसी घाट पर सिरसा दबरई गांव के राजकुमार और सूरज भी डूबने की स्थिति में आ गए। गोताखोरों ने सूरज को बचा लिया, लेकिन राजकुमार की जान नहीं बच सकी।

अटैना घाट पर मैनपुरी के हुसैनपुर निवासी पिंटू गंगा में डूब गए। परिजनों की सूचना पर पहुंची टीम ने कुछ देर बाद उनका शव बरामद किया। वहीं फर्रुखाबाद के न्यूनैहरा गांव के अनुपम और उनके मामा जितेंद्र स्नान के दौरान तैरकर दूसरी ओर जाने लगे, लेकिन बीच में तेज बहाव में फंसने से अनुपम की मौत हो गई।

इसी तरह बरेली के गुलाबनगर क्षेत्र में बहगुल नदी में स्नान कर रहे श्रद्धालुओं के बीच भी हादसा हुआ। 14 वर्षीय आदित्य ठाकुर को बचाने के प्रयास में बदायूं के बिनावर निवासी अभिषेक भी पानी में उतर गए, लेकिन दोनों गहरे पानी में चले गए। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद दोनों के शव बाहर निकाले जा सके।

वहीं कई स्थानों पर गोताखोरों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जान बचाई। कछला घाट पर हाथरस, मुरादाबाद, राजस्थान, एटा और अन्य जिलों से आए दर्जनों श्रद्धालु पानी में फंस गए थे, जिन्हें समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।