बागपत के मवीकलां गांव के एक बैंक्वेट हॉल में बृहस्पतिवार को “नन्हीं कली” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छह बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज मैरी कॉम ने बेटियों को खेल और शिक्षा दोनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में गोल्ड मेडल न मिलने का अफसोस हमेशा रहेगा, लेकिन देश की बेटियां मेहनत और समर्पण से अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं।
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मैरी कॉम, पूर्व क्रिकेटर हितेश चौधरी और डीएम अस्मिता लाल ने मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मैरी कॉम ने कहा कि उनका सपना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना था, लेकिन कांस्य पदक पर ही संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा, “हमेशा देश के लिए खेला और अब बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए जागरूक कर रही हूँ। मेहनती बेटियां जीवन में कभी हार नहीं मानती।”
मैरी कॉम ने बेटियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि बागपत में जल्द ही एक बॉक्सिंग एकेडमी खोली जाएगी, जिसमें बेटियों को खेल के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाएगा।
छात्राओं ने किए सवाल, मैरी कॉम ने दिए उत्तर
कक्षा सात की तनु और कक्षा आठ की साइमा ने मैरी कॉम से खेल और पढ़ाई के संतुलन, बड़े सपनों को साकार करने और सफलता के मूलमंत्र जैसे सवाल पूछे। मैरी कॉम ने धैर्य, मेहनत और आत्मविश्वास की अहमियत बताते हुए उनका मार्गदर्शन किया।
डीएम अस्मिता लाल ने कहा कि बेटियों का भविष्य उज्जवल है और समाज को सामूहिक संकल्प लेकर उनकी प्रगति सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने “नन्हीं कली” को बेटियों की सफलता और प्रगति का प्रतीक बताया।
पूर्व क्रिकेटर हितेश चौधरी ने कहा कि अब जिले की पहचान बेटियां बन रही हैं। कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राएं, मिशन शक्ति पुलिस टीम, एथलीट्स, बॉक्सिंग और तीरंदाजी खिलाड़ी, और माय भारत स्वयंसेवक शामिल रहे। कार्यक्रम में साक्षी, दिव्या, मीनाक्षी, एडीएम विनीत उपाध्याय, एसडीएम अमरचंद वर्मा, एसडीएम मनीष कुमार यादव और पूनम आदि भी मौजूद रहे।
बच्चों को मिली पर्यावरण फ्रेंडली गुड़िया
इस अवसर पर बच्चों को वेस्ट प्लास्टिक से बनी गुड़िया वितरित की गई। यह गुड़िया न केवल खेलने योग्य है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। आमतौर पर गुड़ियों में रूई भरी जाती है, लेकिन बागपत की इस देसी गुड़िया में पुरानी प्लास्टिक बोतलों को बारीक फाइबर में बदलकर मुलायम कपास जैसी सामग्री के रूप में उपयोग किया गया है। इस तरह से बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए खेल की खुशी भी दी गई।