नई दिल्ली/देहरादून। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे पर आधिकारिक रूप से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। करीब 210 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सफर अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक हो गया है। हालांकि, इस एक्सप्रेसवे पर लगने वाले टोल शुल्क ने इसे देश के महंगे मार्गों में शामिल कर दिया है।

टोल दरें और व्यवस्था

इस एक्सप्रेसवे पर कुल पांच टोल प्लाजा बनाए गए हैं। कार से एकतरफा यात्रा के लिए 675 रुपये टोल देना होगा, जबकि 24 घंटे के भीतर आने-जाने (राउंड ट्रिप) पर 1010 रुपये का शुल्क तय किया गया है।

हालांकि, अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक करीब 18 किलोमीटर का हिस्सा फिलहाल टोल फ्री रखा गया है। पहला टोल प्लाजा बागपत-लोनी सीमा के टेक्नोसिटी में स्थित है, इसके बाद शामली के बुटराडा में दूसरा टोल प्लाजा आता है। वहीं सहारनपुर जिले में जैनपुर (बड़गांव), चमारीखेड़ा (छुटमलपुर) और गणेशपुर (बिहारीगढ़) में तीन टोल प्लाजा बनाए गए हैं।

सहारनपुर में ज्यादा टोल

सहारनपुर जिले के भीतर मात्र 47 किलोमीटर की दूरी तय करने पर यात्रियों को तीन बार टोल देना पड़ेगा। फिलहाल पांच में से केवल चमारीखेड़ा टोल प्लाजा पर कार से 85 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि बाकी चार स्थानों पर जल्द ही वसूली शुरू होने की संभावना है।

महंगा लेकिन फायदेमंद सफर

टोल शुल्क के लिहाज से यह एक्सप्रेसवे महंगा जरूर है, लेकिन समय और ईंधन की बचत इसे किफायती बना सकती है। वैकल्पिक मार्गों की तुलना में यहां यात्रा काफी तेज है।

देहरादून से दिल्ली के लिए देवबंद मार्ग से जाने पर करीब 475 रुपये टोल देना पड़ता है, जबकि भगवानपुर-छपार रूट पर लगभग 410 रुपये खर्च होते हैं। हालांकि, ये दोनों रास्ते एक्सप्रेसवे के मुकाबले करीब 50 किलोमीटर लंबे हैं और यात्रा में 5 से 6 घंटे तक लग सकते हैं।

इसके विपरीत, एक्सप्रेसवे के जरिए अब महज ढाई से तीन घंटे में दिल्ली पहुंचना संभव हो गया है, जिससे यात्रियों को समय के साथ-साथ ईंधन की भी अच्छी बचत हो रही है।