बिजनौर। छोईया नदी के किनारे बसे छह से अधिक गांवों में भूजल का स्तर दूषित होने के कारण नलों से गहरा पीला पानी निकल रहा है। ग्राम हादरपुर में इस पानी के सेवन से अब तक 10 लोगों की मौत कैंसर से हो चुकी है, जबकि एक मरीज का इलाज अभी हायर सेंटर में चल रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार इन गांवों में पीलिया और अन्य जलजनित रोगों के मरीज भी लगातार बढ़ रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में भी अक्सर पाइपलाइन टूटने के कारण लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

बिजनौर जिले में 18 नगर निकाय और 1,123 ग्राम पंचायतें हैं। इन क्षेत्रों में पालिका परिषद और नगर पंचायतों का जिम्मा अपने-अपने क्षेत्रों में लाखों निवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। लेकिन पाइपलाइन टूटने और जल सप्लाई न होने के कारण कई स्थानों पर लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

गांवों का भूजल दूषित, नल से पीला पानी
बिजनौर-नगीना रोड से बहने वाली छोईया नदी में पिछले कई सालों से दूषित पानी गिरने के कारण ग्राम हादरपुर, आसपुर नवादा, मौजीपुरा, मोमिनपुर दरगा, गौसपुर, जलालपुर छोइयां, अगरी, अगरा, पथरा-पथरी समेत कई अन्य गांवों का भूजल दूषित हो गया है।

ग्रामीणों ने बताया कि इन गांवों के नलों से करीब 15 मिनट तक गहरा पीला पानी निकलता है। अकेले ग्राम हादरपुर में कैंसर से पीड़ित सोपाल सिंह, कुमरपाल सिंह, दयाराम सिंह, धरम सिंह, नौबहार सिंह, विरेशपाल, उर्मिला देवी, सोनी और वर्तमान ग्राम प्रधान अनुपम देवी की मौत इसी दूषित पानी के सेवन के कारण हुई।

स्थानीय लोगों ने कई बार इस समस्या का समाधान देने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके अलावा मालन नदी में नजीबाबाद शहर और चीनी मिल का औद्योगिक अपशिष्ट भी छोईया नदी में गिराया जा रहा है, जिससे पानी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है।