बिजनौर। जनपद के जाने-माने साहित्यकार और कवि नीरज कांत सोती का वाराणसी में आकस्मिक निधन हो गया। रविवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने हृदय गति रुकने से उनके निधन की पुष्टि की। उनके निधन की खबर मिलते ही बिजनौर के साहित्यिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
शहर के रामलीला चौराहा क्षेत्र के निवासी नीरज कांत सोती साहित्य की कई विधाओं में सक्रिय रहे। उन्होंने कविता, ग़ज़ल, दोहे, छंद और मुक्तक जैसी रचनाओं के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। मंचीय कवि के रूप में भी उनकी विशेष पहचान थी और वे देश के विभिन्न साहित्यिक मंचों पर काव्य पाठ करते रहे। बिजनौर में आयोजित काव्य संध्याओं में उनकी उपस्थिति लगभग नियमित रही।
नीरज कांत सोती का एक उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान सुंदरकांड की चौपाइयों का छंदबद्ध हिंदी रूपांतरण है। उनकी चर्चित पुस्तक ‘सुंदरकांड दृश्यावली’ में रामचरितमानस के सुंदरकांड को सरल और काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हुए।
शैक्षणिक उपलब्धियों की बात करें तो बिहार के एक विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। वर्तमान समय में वे अपने पुत्र अंकुर सोती के साथ आजमगढ़ में रह रहे थे, जहां उनके पुत्र सरकारी सेवा में कार्यरत हैं।
परिजनों के अनुसार, नीरज कांत सोती साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए काशी गए हुए थे और बीते तीन दिनों से वहीं ठहरे थे। रविवार रात करीब एक बजे बेचैनी महसूस होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रात लगभग साढ़े एक बजे उनका निधन हो गया।
वे अपने पीछे पत्नी सुषमा सोती, पुत्र अंकुर सोती, अंकित सोती और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन पर वरिष्ठ साहित्यकारों रमेश चंद माहेश्वरी, अनिल शर्मा, डॉ. अजय जनमेजय, अनिल चौधरी सहित अनेक साहित्य प्रेमियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे हिंदी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया।