बरेली। पुराना शहर निवासी सुहैल हकीम खान ने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआइ) में पांच साल के गहन अध्ययन के दौरान ऊंटनी के दूध में पाए जाने वाले जैव-सक्रिय प्रोटीन को मधुमेह नियंत्रण के लिए उपयोगी पाया है। उनके शोध के अनुसार यह प्रोटीन इंसुलिन के कार्य को बढ़ाने के साथ-साथ अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं के विकास और विभाजन को भी प्रोत्साहित करता है।
डा. खान ने चूहों पर किए गए परीक्षणों में यह पाया कि यह प्रोटीन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में प्रभावी है। उनका मानना है कि अगर इस प्रोटीन पर आधारित हेल्थ सप्लीमेंट या फंक्शनल फूड विकसित किए जाएँ, तो यह आम जनता के लिए एक सुरक्षित, किफायती और प्राकृतिक विकल्प साबित होगा। शोध का उद्देश्य विशेष रूप से टाइप-वन और टाइप-टू मधुमेह के प्रबंधन में कारगर समाधान तैयार करना है।
कैसे करता है काम
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इंसुलिन सुधार: यह शरीर में इंसुलिन के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है।
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जटिलताओं में कमी: यह खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को कम करने में मदद करता है।
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अंगों की सुरक्षा: यह जिगर और गुर्दे की कार्यप्रणाली को बिगड़ने से बचाता है।
डा. खान का यह शोध अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुका है। उन्होंने बताया कि आज मधुमेह केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रहा है। असंतुलित आहार, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी इसे हर उम्र के लोगों के लिए खतरा बना रही है। उनका शोध ने भविष्य में प्राकृतिक और सस्ते एंटी-डायबिटिक उत्पादों के विकास की राह खोली है।