केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में विश्व टीबी दिवस के अवसर पर 100 दिवसीय गहन टीबी उन्मूलन अभियान का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने टीबी मुक्त भारत एप ‘खुशी’ (ई-निक्षय मित्र) लॉन्च किया और टीबी फ्री अर्बन वार्ड इनिशिएटिव वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जेपी नड्डा ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज को इसमें योगदान देना होगा। इस अभियान में 24 मंत्रालयों को जोड़ा गया है और यह देश के 1.58 लाख गांवों और वार्डों में एक साथ चलेगा।
बजट और तकनीकी सुधार
नड्डा ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले टीबी जांच और उपचार के लिए 607 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे अब बढ़ाकर 6365 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मशीनों के माध्यम से अब टीबी की जांच और उपचार तेजी से संभव हो रहा है। इससे मरीज पहले की तुलना में सिर्फ छह माह में स्वस्थ हो रहे हैं, जबकि पहले इसमें दो साल तक का समय लगता था।
उन्होंने यह भी कहा कि अभियान के 100 दिनों के भीतर देशभर में टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। टीबी को समाप्त करने के लिए केवल नारे नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
अनुप्रिया पटेल का बयान
केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम सफलता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। स्वदेशी मशीनों से टीबी की पहचान की जा रही है और इसे जन आंदोलन का रूप दिया गया है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2024 तक 347 जिलों में 20 करोड़ जांच के दौरान 32 लाख टीबी मरीज सामने आए, जिनमें कई बिना लक्षण वाले थे।
उत्तर प्रदेश की भूमिका
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश टीबी उन्मूलन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि 2017 में जहां 241 मशीनें थीं, अब राज्य में 1004 मशीनों से जांच की जा रही है। साथ ही, पहले जहां 59 प्रतिशत मरीज ठीक होते थे, अब यह दर बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है।
इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और 24 मंत्रालयों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इसके अलावा, टीबी उन्मूलन में योगदान देने वाले विजेताओं और निक्षय मित्रों को भी सम्मानित किया गया।