सरकारी दस्तावेजों में एक अजीबोगरीब गलती सामने आई है, जिसमें एक महिला की उम्र उसके ही बेटे से एक वर्ष कम दर्ज हो गई है। इस त्रुटि को ठीक कराने के लिए परिवार पिछले दो साल से अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।

मामला लखनऊ के बंथरा हरौनी क्षेत्र का है, जहां निवासी नीता की वास्तविक उम्र करीब 60 वर्ष बताई जाती है। हालांकि उनके आधार कार्ड में जन्मतिथि 1 जनवरी 1995 दर्ज है, जबकि उनके बेटे शैलेंद्र की जन्मतिथि 1 जनवरी 1996 अंकित है। इसी गड़बड़ी के कारण परिवार को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नीता और उनके परिजनों ने कई बार आधार कार्ड में सुधार के लिए आवेदन किया, लेकिन हर बार उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने अपनी उम्र प्रमाणित कराने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय का भी रुख किया।

सीएमओ कार्यालय पहुंचने पर परिजनों ने परिवार रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए, जिनमें नीता की उम्र लगभग 60 वर्ष दर्ज है। हालांकि, आधार और अन्य रिकॉर्ड में अंतर होने के कारण मामला और उलझ गया।

सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि विभाग के पास फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, जिसके आधार पर मेडिकल जांच कर उम्र निर्धारित की जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी अन्य विभाग से औपचारिक पत्र प्राप्त होता है, तो आयु निर्धारण के लिए बोर्ड गठित किया जा सकता है।

वहीं, पीड़िता के बेटे शैलेंद्र का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से लगातार दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। अब उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।