उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सासनी क्षेत्र के नगला नाई गांव में जन्मदिन समारोह के दौरान हरियाणवी डांसर के साथ हुई छेड़खानी के मामले में बुधवार को महत्वपूर्ण प्रगति हुई। व्यस्त कार्यक्रम के कारण पिछले दो दिनों से बयान दर्ज नहीं करा पाने वाली डांसर आखिरकार हाथरस जिला न्यायालय पहुंचीं और मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए।
कोर्ट में दर्ज हुए बयान
इससे पहले अलग-अलग स्थानों पर शो के कारण डांसर सोमवार और मंगलवार को पेश नहीं हो सकी थीं, जिसके चलते पुलिस लगातार संपर्क में थी। बुधवार को वह सासनी कोतवाली पहुंचीं, जहां से पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें जिला न्यायालय ले जाया गया।
कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने उनके बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 के तहत दर्ज किए गए, जिसके बाद वह वापस लौट गईं।
जन्मदिन पार्टी में हुआ था विवाद
यह घटना 3 जून को नगला नाई गांव में आयोजित एक जन्मदिन कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जहां डांसर को परफॉर्मेंस के लिए बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान गांव के ही सुरेश कुमार नाम के व्यक्ति पर स्टेज पर चढ़कर छेड़खानी करने का आरोप लगा था।
डांसर ने मौके पर ही विरोध करते हुए आरोपी को थप्पड़ जड़ा था और बाद में इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था, जिससे मामला सुर्खियों में आ गया।
सोशल मीडिया पर फिर आईं डांसर
डांसर ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक और वीडियो साझा किया है, जिसमें वह भावुक नजर आईं। वीडियो में उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि वह डरेंगी नहीं और समाज में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस का कहना है कि कोर्ट में दर्ज बयान मामले में अहम सबूत के रूप में काम करेंगे और इसके आधार पर आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट का आदेश: सपना चौधरी को अंतरिम सुरक्षा
इसी बीच दिल्ली के द्वारका कोर्ट ने एक अलग मामले में गायिका और अभिनेत्री सपना चौधरी को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने उनके पति को अगली सुनवाई तक उनसे संपर्क करने या उनके पास आने से रोक दिया है।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट निधि सिंह की अदालत ने यह आदेश सपना चौधरी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिवादी न तो उनसे संपर्क करेगा, न ही उनके घर या कार्यस्थल जाएगा।
सपना चौधरी ने अपनी याचिका में व्यक्तिगत सुरक्षा और पेशेवर गतिविधियों में बाधा की आशंका जताई थी, जिसके आधार पर अदालत ने यह अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।