लखनऊ में राजनीतिक माहौल उस समय गर्म हो गया जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि सपा के करीब 25 से 26 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी छोड़ने की इच्छा रखते हैं। हालांकि, मौर्य ने यह भी जोड़ा कि भाजपा फिलहाल उन्हें अपने दल में शामिल करने की कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की स्थिति पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विरोधियों जैसी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सपा का संगठन कमजोर पड़ रहा है और पार्टी नेतृत्व उसे प्रभावी ढंग से संभाल नहीं पा रहा है।
केशव मौर्य ने आगे कहा कि भाजपा प्रदेश की सत्ता में मजबूत स्थिति में है और भविष्य में भी बनी रहेगी, जबकि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक आधार लगातार सिमटता जा रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या सपा नेता रामगोपाल यादव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संपर्क में हैं, तो उन्होंने इस पर सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
उधर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मौर्य के बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह मजबूत है और जो लोग दबाव या डर के कारण पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वयं चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा जैसी बड़ी पार्टी का मुकाबला करने के लिए साहसी और प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं की जरूरत होती है और सपा इस चुनौती के लिए तैयार है।
अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए दावा किया कि भाजपा के भीतर भी कई विधायक असंतुष्ट हैं और पाला बदलने का मन बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी वे सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि भाजपा के विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करने की उनकी कोई योजना नहीं है।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष लगातार दूसरी पार्टियों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करता रहा है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक राजनीति में जनता के मुद्दों पर मुकाबला होना चाहिए, न कि दलों को तोड़ने की राजनीति पर।