नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिमी जिले की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड (AATS) ने दिल्ली-NCR में सक्रिय एक बड़े वाहन चोरी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन रिसीवर सहित कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह महंगी कारों की चोरी कर उन्हें फर्जी दस्तावेजों और नंबर प्लेट के जरिए बेचने या उनके पार्ट्स अलग-अलग करने में शामिल था।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर नौ चोरी की कारें, एक मोटरसाइकिल, 18 फर्जी नंबर प्लेट, 21 रिमोट/डुप्लीकेट चाबियां, ओबीडी स्कैनर, ड्रिल मशीन और लॉक तोड़ने वाले उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस का दावा है कि इस कार्रवाई से वाहन चोरी के करीब 10 मामलों का खुलासा हुआ है।
डीसीपी अमित गोयल के अनुसार, जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि एक चोरी की हुंडई क्रेटा मुनिरका क्षेत्र की ओर लाई जा रही है। इसके बाद सुबह करीब सात बजे अरुणा आसफ अली रोड पर बैरिकेडिंग कर वाहन को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन चालक ने भागने का प्रयास किया। पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया और मेरठ निवासी आसिम उर्फ दीवाना को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि कार पर लगी नंबर प्लेट फर्जी थी और असली वाहन मॉडल टाउन थाना क्षेत्र से चोरी किया गया था। इसके बाद मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने रियाजुद्दीन, कुलदीप वर्मा, आरिफ और सतीश कुमार पाल को भी गिरफ्तार किया।
इसी मामले में चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त में शामिल फजर, महमूद खान और उजैर कुरैशी को भी दबोचा गया। इनके पास से कई लग्जरी गाड़ियां बरामद हुईं, जिनमें हुंडई क्रेटा, मारुति बलेनो, स्विफ्ट, वैगनआर, हुंडई आई-20 और हुंडई एक्सटर सहित अन्य वाहन शामिल हैं।
कैसे काम करता था गिरोह
पुलिस के अनुसार यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर गाड़ियां चोरी करता था। डुप्लीकेट चाबियों, रिमोट डिवाइस और ओबीडी स्कैनर की मदद से वाहन चुराए जाते थे। इसके बाद इंजन और चेसिस नंबर बदलकर फर्जी नंबर प्लेट लगाई जाती थी।
चोरी की कुछ गाड़ियां फर्जी कागजात के आधार पर बेच दी जाती थीं, जबकि कई वाहनों को काटकर उनके पुर्जे अलग-अलग बाजार में बेचे जाते थे।
आपराधिक इतिहास
पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी आसिम के खिलाफ पहले से 63 मामले दर्ज हैं। वहीं रियाजुद्दीन पर 11, कुलदीप पर 12, आरिफ पर 13 और सतीश पर 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला हुआ है और आगे की जांच जारी है।