मुजफ्फरनगर: चकबंदी विभाग एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। मुजफ्फरनगर के पुरबालियान गांव में एक किसान और चकबंदी अधिकारी के बीच कथित अभद्रता और हाथापाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय किसानों में गहरा आक्रोश फैल गया है।
वायरल वीडियो को लेकर अब भारतीय किसान यूनियन ने भी खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। संगठन से जुड़े नेता विकास शर्मा ने मामले को किसानों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा बताते हुए चकबंदी विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभाग में भ्रष्टाचार और मनमानी लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों की शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।

विकास शर्मा ने आरोप लगाया कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान किसानों की वास्तविक जोतों में बदलाव कर गलत तरीके से जमीन का आवंटन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई जगहों पर 26 फीट चौड़ी सड़कों को 18 फीट मापकर किसानों के हिस्से में कटौती की जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी अनियमितताएं केवल पुरबालियान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुथरा, रोनी हरजीपुर और भमेला जैसे कई गांवों से भी इसी तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

भाकियू नेता ने प्रशासन से वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इसी बीच संगठन ने घोषणा की है कि आगामी 22 जून को मुज़फ्फरनगर स्थित चकबंदी विभाग कार्यालय का घेराव किया जाएगा। भाकियू का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई है और जब तक कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा।