अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। वहीं विपक्षी दलों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अफवाह फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव की सोच “बाबरवादी” है। डिप्टी सीएम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि सपा प्रमुख ने हमेशा न्यायपालिका के निर्णयों का सम्मान नहीं किया और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर भी उनकी चुप्पी रही।

ब्रजेश पाठक ने आगे कहा कि राम मंदिर को लेकर गलत जानकारी फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी को जनता के बीच इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि राम मंदिर से जुड़ी कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला जनभावनाओं और आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। अजय राय ने सरकार से अपील की कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

उधर, आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दान और चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें गंभीर हैं और इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

संजय सिंह ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता जरूरी है और यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी पूरी जांच होनी चाहिए।

इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता और तथ्यों की पूरी स्पष्टता जरूरी है।

कुल मिलाकर, राम मंदिर दानपात्र से जुड़े कथित गबन के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।